डेस्क: महाराष्ट्र FDA ने बच्चों के खाने के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। अब पैकेज पर ब्रेस्टफ़ीडिंग के बारे में चेतावनी देना ज़रूरी है और विज्ञापनों, मुफ़्त सैंपल और प्रमोशनल ऑफ़र पर रोक लगा दी गई है। फ़ॉर्मूला मिल्क पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, लेकिन इसे नई ज़रूरतों को पूरा करना होगा। नियमों में बेबी फ़ूड की पैकेजिंग पर माँ और बच्चे की तस्वीरें लगाने और कुछ तरह के दावे करने पर भी रोक लगाई गई है।
FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे द्वारा जारी आदेश में फ़ॉर्मूला मिल्क पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। फ़ॉर्मूला और बच्चों के खाने के अन्य उत्पाद बेचे जा सकते हैं, लेकिन निर्माताओं और विक्रेताओं को नई ज़रूरतों का पालन करना होगा।
बच्चे के लिए मां का दूध सबसे अच्छा
नई गाइडलाइंस के तहत, बेबी फ़ूड के पैकेट पर यह संदेश होना चाहिए, आपके बच्चे के लिए मां का दूध सबसे अच्छा है। ऐसे उत्पादों पर मां या बच्चे की तस्वीरें लगाने पर भी रोक लगा दी गई है। निर्माता ऐसे दावे नहीं कर सकते जिनसे यह लगे कि उनके उत्पाद मां के दूध के बराबर हैं। इन नियमों में बच्चों के लिए मिल्क फ़ूड, फ़ॉलो-अप फ़ॉर्मूला, कॉम्प्लिमेंट्री फ़ूड (पूरक आहार), अनाज और दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अन्य उत्पाद शामिल हैं। पैकेजिंग पर यह भी साफ़ तौर पर लिखा होना चाहिए कि कॉम्प्लिमेंट्री फ़ूड छह महीने के बाद ही शुरू किए जाने चाहिए और इनका इस्तेमाल हेल्थ वर्कर की सलाह पर ही करना चाहिए।
बेबी फ़ूड प्रोडक्ट पर एड पर रोक
FDA ने इन्फ़ैंट फ़ॉर्मूला और बच्चों के खाने के अन्य उत्पादों के विज्ञापनों और प्रचार गतिविधियों पर भी रोक लगा दी है। इस आदेश के तहत मुफ़्त सैंपल, गिफ़्ट, कूपन और अन्य प्रमोशनल ऑफ़र जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। आदेश से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, इन प्रतिबंधों में इन्फ़्लुएंसर और सोशल मीडिया के जरिए की जाने वाली प्रचार गतिविधियां भी शामिल हैं। मुंडे ने कहा कि FDA के सर्वे में बच्चों के खाने के उत्पादों की मार्केटिंग और लेबलिंग के तरीकों में कई उल्लंघन पाए गए थे। उन्होंने कहा कि नियमों के पालन से जुड़ी मुख्य चिंताओं में से एक यह थी कि ब्रेस्टफीडिंग के महत्व के बारे में जानकारी नहीं दी जा रही थी।
कमिश्नर ने कहा कि इन उपायों का मकसद ब्रेस्टफीडिंग को बढ़ावा देना और यह पक्का करना था कि शिशुओं को सही पोषण मिले। मुंडे ने ऐसे आंकड़े पेश किए जिनसे पता चलता है कि महाराष्ट्र में जन्म के बाद पहले घंटे से लेकर छह महीने की उम्र तक ब्रेस्टफीडिंग की दर शहरी इलाकों में 52.8 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 75.2 प्रतिशत थी। उन्होंने सर्वे के उन आंकड़ों का भी ज़िक्र किया जिनसे पता चलता है कि 10 से 12 साल की उम्र के 25 प्रतिशत बच्चों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी। मुंधे ने इसकी वजह ब्रेस्टफीडिंग न होना बताया।


