डेस्क: पटना उच्च न्यायालय ने जहानाबाद स्थित ऐतिहासिक मौर्यकालीन बराबर गुफाओं की बदहाली, श्रावणी मेले के दौरान हुए हादसों और प्रशासनिक लापरवाही पर बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है और अगले छह सप्ताह में विकास का खाका प्रस्तुत करने को कहा है।
न्यायमूर्ति राजीव रॉय की एकलपीठ ने प्रशासन से सवाल पूछते हुए कहा कि यदि तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की यह विश्वविख्यात धरोहर देश के किसी अन्य हिस्से या विदेश में होती, तो क्या इसकी इतनी उपेक्षा होती? अदालत ने अपने आदेश के पैरा 25 में महाराष्ट्र की अजंता-एलोरा गुफाओं और मध्य प्रदेश के सांची स्तूप का उदाहरण देते हुए कहा कि बुनियादी सुविधाओं और पर्यटकों की उचित देखरेख से बराबर की गुफाएं ऐतिहासिक स्थल के रूप में राजस्व का स्रोत बन सकती हैं। यह भी कहा की ऐसी धरोहर यदि दक्षिण भारत, पश्चिम भारत या मध्य प्रदेश में होतीं तो इतनी भयानक उपेक्षा की जगह बड़े राजस्व अर्जन का माध्यम बन गई होती।
हाईकोर्ट ने कहा कि जिला प्रशासन केवल राजस्व और टेंडर राशि वसूलने में रुचि रखता है, लेकिन उस धन का एक प्रतिशत भी बुनियादी सुविधाओं के विकास पर खर्च करने की जिम्मेदारी नहीं निभाता। अदालत ने कहा कि मेले से प्राप्त राजस्व का उपयोग क्षेत्र के विकास, स्वच्छता, सुरक्षा और स्थायी आधारभूत संरचनाओं के निर्माण में होना चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि वर्ष 2024 में भी बराबर गुफाओं में इन सुविधाओं का अभाव था और अभी भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। जिला प्रशासन ने कोई सबक नहीं सीखा, जिसके कारण महान मौर्यकालीन धरोहर उपेक्षित है।


