डेस्क: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (External Affairs Minister Dr. S. Jaishankar) ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के 81वें सत्र में आतंकवाद (Terrorism) को लेकर भारत (India) का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि इसके खिलाफ किसी तरह की ढील स्वीकार नहीं की जा सकती। पाकिस्तान (Pakistan) का सीधे नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि हाल में आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने वाले एक देश ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया है।
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद फैलाने वालों को अपना रवैया बदलना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोस्ती और सद्भावना के साथ आतंकवाद नहीं चल सकता। भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम रहेगा।
शांति के बिना विकास भी प्रभावित होता है
UNGA में अपने संबोधन के दौरान जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से हुई थी। इसके बावजूद संघर्ष और टकराव आज भी वैश्विक चिंता के प्रमुख कारण बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखने में नाकामी का असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विकास और प्रगति की रफ्तार भी प्रभावित होती है। आज की वैश्वीकृत दुनिया में किसी एक हिस्से में होने वाले युद्ध का प्रभाव दूसरे क्षेत्रों पर भी पड़ता है।
यूक्रेन में जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह युद्ध अब पांचवें साल में पहुंच चुका है और यह गंभीर चिंता का विषय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों का उल्लेख करते हुए जयशंकर ने कहा कि अब अंतहीन युद्धों को समाप्त करने का समय है।
कमर्शियल शिपिंग और नाविकों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं
जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में कमर्शियल शिपिंग और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि व्यापारिक जहाजों और समुद्री कर्मचारियों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।
उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। यह मुद्दा ऐसे समय में उठा है, जब पश्चिम एशिया और आसपास के समुद्री मार्गों में जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
भारत और लाइबेरिया ने UNGA के दौरान ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स’ की शुरुआत भी की है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापारिक जहाजों और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना है।
फिलिस्तीनियों के लिए भारत की मानवीय मदद का जिक्र
जयशंकर ने फिलिस्तीनी लोगों के लिए भारत की ओर से जारी मानवीय सहायता और राहत प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शांति का अर्थ केवल युद्ध का खत्म होना नहीं है। इसके लिए स्थिरता, सुरक्षा और भरोसे का माहौल बनाना भी जरूरी है।
उनके मुताबिक यदि दुनिया लगातार खतरों और दबावों के बीच रहेगी तो शांति कमजोर होगी। इसलिए शांति के लिए जरूरी परिस्थितियों को मजबूत करना होगा।
पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भारत के रुख को दोहराते हुए जयशंकर ने कहा कि स्थायी शांति के लिए ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ यानी दो-राष्ट्र समाधान जरूरी है।
दुनिया में बढ़ रही ‘हर चीज को हथियार बनाने’ की प्रवृत्ति
विदेश मंत्री ने वैश्विक व्यवस्था में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और दबाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के दशकों बाद भी दुनिया में हर चीज को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
उन्होंने वित्त और बाजार तक पहुंच सीमित करने, सप्लाई चेन में रुकावट डालने और तकनीक तक पहुंच रोकने जैसे कदमों का जिक्र किया। जयशंकर ने कहा कि प्रतिस्पर्धा की यह सोच अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भी कमजोर कर रही है।
ग्लोबल साउथ के सामने 4F संकट
जयशंकर ने ग्लोबल साउथ की स्थिति को विशेष रूप से गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को ‘4F’ संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसमें Food (भोजन), Fuel (ईंधन), Fertiliser (उर्वरक) और Finance (वित्त) शामिल हैं। इससे पहले भी उन्होंने UN से जुड़े कार्यक्रमों में ग्लोबल साउथ को वैश्विक संकटों के बीच निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व देने की जरूरत पर जोर दिया है।
UN के मंच से पाकिस्तान को लेकर कड़ा संदेश
जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने UNGA में कश्मीर और भारत के साथ विवादों का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में जयशंकर ने पाकिस्तान को ‘आतंकवाद का लगातार अभ्यास करने वाला’ बताते हुए कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने भारत के अपने बचाव के अधिकार का भी उल्लेख किया।
इससे एक दिन पहले UN मुख्यालय में एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर भी जयशंकर की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी। पत्रकार ने भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया था। इस पर जयशंकर ने जवाब दिया, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है।” भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि हरिश पार्वथनेनी ने इसके बाद पत्रकार से कहा कि उसने जवाब स्पष्ट रूप से सुन लिया है।
जयशंकर के UNGA संबोधन में आतंकवाद, युद्ध, समुद्री सुरक्षा, ग्लोबल साउथ की चुनौतियों और पश्चिम एशिया में स्थायी शांति जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख के साथ-साथ संघर्षों को कम करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।


