राष्ट्रीय

3.85 करोड़ खर्च, पानी भरते ही ढही टंकी, मऊगंज की नल-जल योजना पर उठे सवाल,पाइपलाइन भी अधूरी

डेस्क: मऊगंज जिले में नल-जल योजना में हुए भ्रष्टाचार के मामले में, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW ने बड़ी कार्रवाई की है. नल-जल योजना के काम में अनियमितता और गुणवत्ताविहीन निर्माण के आरोप में, तत्कालीन अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. आरोप है कि काम पूरा किए बिना ही, ठेकेदार को करीब 3 करोड़ 85 लाख रुपये का पूरा भुगतान कर दिया गया.
नईगढ़ी तहसील के खटखरी गांव में नई बनी पानी की टंकी, पहली बार पानी भरने के दौरान ही ढह गई. EOW की जांच में टंकी के निर्माण से जुड़े काम की गुणवत्ता पर भी सवाल सामने आए. पूरा मामला मऊगंज जिले के नईगढ़ी विकासखंड में वर्ष 2021 में, जल जीवन मिशन योजना के तहत कराए गए नल-जल योजना के कार्यों से जुड़ा है.

जांच में कई जगह काम अधूरा मिला
योजना के तहत विभिन्न गांवों में पानी की टंकियों का निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और हर घर नल कनेक्शन देने का काम कराया जाना था. ठेकेदार को 3 करोड़ 85 लाख 900 रुपये की राशि का भुगतान किया गया, लेकिन जांच में कई जगह काम अधूरा और गुणवत्ताविहीन पाया गया. नईगढ़ी तहसील के खटखरी गांव में बनाई गई पानी की टंकी पहली बार पानी भरने के दौरान ही टूटकर गिर गई.
वहीं करीब 4400 मीटर पाइपलाइन बिछाने और 315 घरेलू नल कनेक्शन देने का प्रावधान था, लेकिन आरोप है कि पाइपलाइन गांव के बाहर तक ही बिछाई गई और कई घरों के अंदर नल फिटिंग नहीं की गई. इसके अलावा जुड़मनिया रघुनाथ, खटखरी, करह उर्फ खैरगढ़ और शिवराजपुर गांवों में भी जल प्रदाय से जुड़े कई काम अधूरे या गुणवत्ताविहीन पाए जाने की बात सामने आई.

ओवरहेड टैंक और सम्पवेल का निर्माण भी अधूरा
जांच में यह भी सामने आया कि करह गांव में पांच मोटर पंप लगाए जाने का दावा था, लेकिन मौके पर एक ही सबमर्सिबल मोटर मिली और कई घरों में नल फिटिंग नहीं पाई गई. शिवराजपुर में ओवरहेड टैंक और सम्पवेल का निर्माण भी अधूरा मिला. इन अनियमितताओं के बावजूद ठेकेदार को भुगतान किए जाने का आरोप है.
मामले में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री, जेपी दिवेदी, तत्कालीन सहायक यंत्री, संजय पांडेय, तत्कालीन उपयंत्री एपी तिवारी और संबंधित ठेकेदार को आरोपी बनाया गया है, जिनके खिलाफ मामला दर्ज कर जांच में लिया है. आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में संशोधन अधिनियम 2018 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है.

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