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MP: इंदौर की झांकी में दिखा ‘Gen Z’ का नया अंदाज, आधुनिकता के बीच में संस्कार और देशभक्ति का संदेश

डेस्क: अनंत चतुर्दशी की रात जब इंदौर की ऐतिहासिक झांकियां सड़कों पर उतरेंगी, तो इस बार नगर निगम की झांकी में सिर्फ रोशनी और सजावट नहीं, बल्कि Gen Z यानी नई युवा पीढ़ी की कहानी भी नजर आएगी। डिजिटल दुनिया में पैदा हुई पीढ़ी को भगवान गणेश की प्रतिमा के साथ दिखाकर नगर निगम ने एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। तकनीक के दौर में आगे बढ़ो, लेकिन अपनी संस्कृति और जड़ों को पीछे मत छोड़ो। इस झांकी की सबसे खास बात यही है कि इसमें Gen Z को केवल मोबाइल, सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया से जोड़कर नहीं दिखाया गया है। इसके बजाय शिक्षा, कौशल, रोजगार, उद्यमिता, आध्यात्मिकता, संस्कार और देशभक्ति को उसके भविष्य का हिस्सा बताया गया है।

मोबाइल वाली Gen Z अब गणेश के साथ!
नगर निगम की झांकी में भगवान गणेश की प्रतिमा के साथ आगे बढ़ती युवा पीढ़ी को दिखाया जाएगा। यह दृश्य अपने आप में झांकी का सबसे बड़ा आकर्षण बनने की तैयारी में है। एक तरफ आज की Gen Z है, जो तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में बड़ी हो रही है। वहीं दूसरी तरफ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराएं हैं। झांकी के जरिए दोनों के बीच एक कड़ी जोड़ने की कोशिश की गई है। संदेश सीधा है कि आधुनिक बनना है तो बनो, लेकिन अपनी पहचान भूलकर नहीं।

पहले हिस्से में दिखेगा बदलता इंदौर
नगर निगम की झांकी का एक हिस्सा शहर के विकास को समर्पित रहेगा। इसमें सौर ऊर्जा, जल संरक्षण और वाटर रिचार्जिंग जैसे प्रयासों को दिखाया जाएगा। इसके अलावा स्मार्ट सिटी, अमृत मिशन के तहत 24 घंटे पानी की व्यवस्था, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान, मेट्रो प्रोजेक्ट और मास्टर प्लान के तहत सड़क निर्माण जैसे कामों को भी झांकी में जगह दी गई है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी को साफ कर निर्माण कार्यों और उद्यानों में इस्तेमाल करने की व्यवस्था के साथ स्वच्छता और ट्रैफिक से जुड़े प्रयासों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। यानी झांकी में यह दिखाने की कोशिश है कि शहर केवल सड़कों और इमारतों से नहीं बनता, बल्कि पानी, हरियाली, स्वच्छता और बेहतर यातायात व्यवस्था भी शहर के विकास का हिस्सा हैं।

Gen Z के लिए सिर्फ नौकरी नहीं, अपना काम करने का संदेश
झांकी का दूसरा हिस्सा पूरी तरह नई पीढ़ी पर केंद्रित रहेगा। इसमें शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और उद्यमिता के जरिए युवाओं के भविष्य की तस्वीर दिखाई जाएगी। युवा संगम, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, स्वरोजगार योजनाएं, My Bharat पोर्टल और मुद्रा ऋण जैसी योजनाओं को इसके जरिए प्रदर्शित किया जाएगा। नगर निगम की थीम में युवाओं को सिर्फ नौकरी तलाशने वाली पीढ़ी के रूप में नहीं, बल्कि नौकरी देने और अपना कारोबार खड़ा करने वाली पीढ़ी के रूप में दिखाने की कोशिश की गई है।

विकास के साथ देश की तस्वीर भी दिखेगी
झांकी के तीसरे हिस्से में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन के 25 वर्षों से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें जनकल्याणकारी शिविर, महिला उद्यमिता, आयुष्मान भारत, जनजातीय क्षेत्रों के विकास और बिजली-पानी-आवास-शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कामों को दिखाने की तैयारी है। इसके साथ स्वच्छ और हरित ऊर्जा को लेकर किए जा रहे प्रयासों तथा समान नागरिक संहिता से जुड़े विधायी घटनाक्रम को भी झांकी में शामिल किया जाएगा।

कृष्ण-सुदामा की दोस्ती से Gen Z को क्या संदेश?
झांकी का एक और हिस्सा भगवान कृष्ण और सुदामा की दोस्ती पर आधारित होगा। यहां आधुनिकता के बीच पुराने संस्कारों और रिश्तों की अहमियत को सामने रखा जाएगा। कृष्ण-सुदामा की मित्रता के जरिए ईमानदारी, त्याग, सम्मान और भरोसे का संदेश दिया जाएगा। झांकी यह बताने की कोशिश करेगी कि तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, लेकिन रिश्तों की कीमत और सच्ची दोस्ती की अहमियत खत्म नहीं होनी चाहिए।

एक झांकी में इंदौर का विकास, Gen Z का भविष्य और संस्कृति
इस बार नगर निगम की झांकी को सिर्फ एक पारंपरिक झांकी की तरह नहीं, बल्कि इंदौर के विकास और नई पीढ़ी के भविष्य की कहानी के तौर पर पेश करने की तैयारी है। जहां एक हिस्से में शहर की विकास योजनाएं नजर आएंगी, वहीं दूसरे हिस्से में Gen Z के सपने और संभावनाएं दिखाई देंगी। इसके साथ देश के विकास और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को भी जोड़ा गया है। अनंत चतुर्दशी की रात जब यह झांकी इंदौर की सड़कों पर निकलेगी, तब सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या Gen Z आधुनिकता और आध्यात्मिकता के बीच संतुलन बना पाएगी? नगर निगम की झांकी इसी सवाल का अपना जवाब देती नजर आएगी- हाथ में तकनीक हो सकती है, लेकिन दिल में संस्कृति और देश के प्रति जिम्मेदारी भी होनी चाहिए।

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