डेस्क: नांदेड जिले में बारिश की लंबी खामोशी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अर्धापुर तहसील में भी हालात चिंताजनक बताए जा रहे हैं. पिछले करीब डेढ़ से दो महीने से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन और कपास की फसल पर इसका सीधा असर पड़ा है. खेतों में सोयाबीन की फसल भले ही खड़ी नजर आ रही हो, लेकिन कई जगह फलियों में दाने नहीं बनने से उत्पादन प्रभावित हुआ है.
फसल की इस स्थिति को लेकर किसानों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है. किसानों का कहना है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि खेतों का दौरा कर रहे हैं और बैठकें भी हो रही हैं, लेकिन उन्हें जमीनी स्थिति के मुताबिक राहत नहीं मिल रही है. किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों को चुनौती देते हुए कहा कि पूरे खेत में जाकर सिर्फ एक किलो सोयाबीन निकालकर दिखा दीजिए. इसके बदले हम आपको क्विंटल भर काजू, बादाम और पिस्ता देने को तैयार हैं. इसके लिए होने वाला खर्च भी गांव के लोग मिलकर उठाएंगे.
अर्धापुर तहसील के दाभड़ गांव के किसान आत्माराम टेकाले ने सूख चुकी सोयाबीन की फसल के बीच खड़े होकर अपनी परेशानी बताई. उनका कहना है कि बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन की फसल समय से पहले सूख गई. फलियों में पर्याप्त दाने नहीं बनने से खेती पर किया गया खर्च निकालना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है.
टेकाले ने कहा कि फसल खराब होने के बाद अब सबसे बड़ी चिंता उसकी कटाई को लेकर है. जब उत्पादन ही नहीं हुआ तो मजदूरों की मजदूरी और कटाई का खर्च कैसे निकलेगा, यह बड़ा सवाल है. फसल के नुकसान से परेशान किसानों ने अब प्रशासन से सिर्फ निरीक्षण और बैठकों के बजाय जमीन पर वास्तविक स्थिति का आकलन कर तत्काल राहत का निर्णय लेने की मांग की है.


