हरियाणा

कुश्ती में लगी चोट तो थामी राइफल…एशियन गेम्स में हरियाणवी छोरे ने निशानेबाजी में जीते 2 रजत पदक, मुख्यमंत्री ने भी दी बधाई

डेस्क: जापान के नगोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में जींद जिले के गांव डाहौला निवासी हिमांशु ढिल्लों ने निशानेबाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए दो रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। हिमांशु ने 10 मीटर एयर राइफल के टीम और व्यक्तिगत दोनों इवेंट में सिल्वर मेडल अपने नाम किए।

हिमांशु की इस उपलब्धि की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव डाहौला पहुंची, गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों और ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई। ग्रामीणों ने बताया कि हिमांशु के गांव लौटने पर उनका भव्य नागरिक अभिनंदन किया जाएगा।
दादी बोलीं- रातभर टीवी के सामने बैठकर देख रहे थे मुकाबला
हिमांशु की दादी बीरमति अपने पोते की उपलब्धि से बेहद भावुक हैं। उन्होंने बताया कि मुकाबले के दौरान पूरा परिवार टीवी के सामने बैठा रहा। उन्होंने कहा कि रात 9 बजे से ही दिल थामकर मैच देख रहे थे कि उनका पोता जीतेगा या हारेगा।
दादी ने कहा, “पोते ने मेरा बहुत बड़ा सपना पूरा कर दिया। वह बचपन से ही बहुत मेहनती और सीधा-सादा बच्चा है। अब हमारा सपना है कि हिमांशु ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल लेकर आए।”
कुश्ती में लगी चोट, फिर निशानेबाजी को बनाया लक्ष्य
हिमांशु के चाचा संदीप ढिल्लों ने बताया कि हिमांशु के खेल सफर की शुरुआत कुश्ती से हुई थी। हिमांशु और उनके भाई को शुरुआत में पुंडरी गुरुकुल भेजा गया था। वहां हिमांशु को कुश्ती का शौक हुआ और उन्होंने इसका अभ्यास शुरू किया।
हालांकि अभ्यास के दौरान चोट लगने के कारण उन्हें कुश्ती छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने निशानेबाजी को अपना लक्ष्य बनाया। पुंडरी गुरुकुल में ही उनकी मुलाकात कोच कुलदीप से हुई। बाद में कोच के कैथल के नैरा शूटिंग क्लब में जाने पर हिमांशु भी कैथल चले गए। बेहतर प्रशिक्षण और राष्ट्रीय स्तर के कैंपों के लिए बाद में उन्होंने दिल्ली में भी प्रशिक्षण लिया।
सीमित साधनों के बावजूद परिवार ने नहीं आने दी कोई कमी
खेतीबाड़ी करने वाले चाचा संदीप ने बताया कि परिवार के पास करीब छह किले जमीन है। सीमित साधनों के बावजूद परिवार ने हिमांशु के खेल प्रशिक्षण और उससे जुड़े खर्चों में कभी कमी नहीं आने दी।
उन्होंने कहा, “हमें इस दिन का वर्षों से इंतजार था। हिमांशु ने हमारी मेहनत और परिवार के त्याग को सफल कर दिया।”
परिवार कैथल हुआ शिफ्ट, दूध-दही और चूरमा पसंद
हिमांशु की चाची किरण ने बताया कि शूटिंग की ट्रेनिंग और पढ़ाई को सुचारू रखने के लिए संयुक्त परिवार कैथल शिफ्ट हो गया था। उन्होंने कहा कि मुकाबला बेहद कड़ा था और स्कोर लगातार ऊपर-नीचे हो रहा था, लेकिन हिमांशु की वर्षों की मेहनत आखिरकार रंग लाई।
परिवार के मुताबिक हिमांशु को दूध, दही, घी और हरियाणा का पारंपरिक चूरमा बेहद पसंद है।
मुख्यमंत्री ने भी दी बधाई
हिमांशु की दोहरी उपलब्धि पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने हिमांशु की उपलब्धि को हरियाणा और देश के लिए गौरव का विषय बताया। अब हिमांशु के परिवार और ग्रामीणों की निगाहें उनके अगले लक्ष्य पर हैं। परिवार का कहना है कि एशियन गेम्स में दो रजत पदकों के बाद अब सपना ओलंपिक के मंच पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने का है।

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