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मिथिला की कला-संस्कृति देख अभिभूत हुए सात प्रशासनिक अधिकारी

मिथिला की कला-संस्कृति देख अभिभूत हुए सात प्रशासनिक अधिकारी

छह आइएएस व एक भारतीय वन सेवा अधिकारी ने मां श्यामा मंदिर में की पूजा-अर्चना

दरभंगा/ निशांत झा : मिथिला की कला, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से रूबरू होने पहुंचे छह आइएएस और एक भारतीय वन सेवा अधिकारी शुक्रवार को मां श्यामा मंदिर पहुंचे। अधिकारियों ने माधवेश्वर परिसर स्थित मां श्यामा मंदिर के साथ लक्ष्मीश्वरी तारा, मां अन्नपूर्णा, रुद्रेश्वरी काली और कामेश्वरी श्यामा मंदिर में दर्शन-पूजन किया। मंदिरों की स्थापत्य कला और ऐतिहासिक विशेषताओं का अधिकारियों ने गंभीरता से अवलोकन किया।

यूनाइटेड मिथिला फेडरेशन के सह-संस्थापक सुमित जय झा के नेतृत्व में पहुंचे यूपीएससी ऑल इंडिया रैंक होल्डर आकाश कुमार, उज्ज्वल प्रियांक, राघव झुनझुनवाला, यशवर्धन राज, प्राची हनी, हर्ष वर्धन अशोक और कुमार विवेकानंद ने मां श्यामा का दर्शन किया।

इस दौरान कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर साहित्य विभागाध्यक्ष सह मां श्यामा मंदिर न्यास समिति के न्यासी सदस्य डॉ. संतोष कुमार पासवान ने अधिकारियों को मंदिरों के इतिहास, वास्तुकला तथा इनके संस्थापकों की आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अवगत कराया।

दर्शन-पूजन के बाद डॉ. संतोष कुमार पासवान और आचार्य डॉ. सोमेश्वर नाथ झा दधीचि ने संयुक्त रूप से सभी अतिथियों को मां श्यामा की चुनरी और मां के विग्रह की तस्वीर भेंट की।

इसके बाद अधिकारियों ने कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय का परिभ्रमण किया। विश्वविद्यालय के मुख्य प्रशासनिक भवन लक्ष्मी विलास पैलेस की नक्काशी और ऐतिहासिक स्थापत्य को देखकर अधिकारी काफी प्रभावित हुए। भवन में प्रयुक्त लाल ईंटों की विशेषता भी उनके आकर्षण का केंद्र रही।

उज्ज्वल कुमार ने कहा कि मिथिला के अंतिम नरेश महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह की प्राच्य विद्या और संस्कृत के प्रति निष्ठा व प्रेम का यह विश्वविद्यालय जीवंत परिचायक है। महाराजा की दानशीलता और सांस्कृतिक दृष्टि को विश्वविद्यालय की विरासत में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

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