डेस्क: दुनिया की सबसे ताकतवर वायु सेना कहे जाने वाले अमेरिका के सैन्य विमानों और ड्रोन्स को मिल रहे लगातार झटकों ने वैश्विक रक्षा जगत में उसके हथियारों की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. यमन में हूती विद्रोहियों द्वारा एक लोकल मिसाइल से अमेरिकी F-15 को मार गिराने के दावे ने इस बहस को और तेज कर दिया है.
ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी 2026 से जारी संघर्ष (जो अब लगभग 203 दिन यानी करीब 7 महीने का हो चुका है) के दौरान अमेरिकी एयर पावर को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. हालांकि जून में एक समझौता हुआ था, लेकिन जुलाई से दोबारा शुरू हुई गोलीबारी के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास तनाव और हमले अभी भी जारी हैं. दिलचस्प बात यह है कि जो देश कभी दूसरों की सैन्य क्षमताओं पर सवाल उठाते थे, आज उनके अपने आधुनिक विमान और ड्रोन युद्ध के मैदान में लगातार धराशायी हो रहे हैं.
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MQ-9 रीपर ड्रोन: सबसे बड़ा नुकसान इसी हाई-एंड ड्रोन को हुआ है. जून तक लगभग 30 ड्रोन नष्ट हुए थे, जो अगस्त तक बढ़कर 45 तक पहुंच गए और सितंबर में भी यह सिलसिला जारी है.
F-15E स्ट्राइक ईगल: कुल 4 विमान नष्ट हुए हैं (जिनमें से 3 कुवैत में ‘फ्रेंडली फायर’ यानी अपनी ही सेना की गलती से और 1 ईरान के ऊपर गिरा). सितंबर में कुछ अन्य विमानों के क्षतिग्रस्त होने की भी खबर है.
अन्य विमान और हेलीकॉप्टर: F-35A (कम से कम 1 क्षतिग्रस्त), A-10 (1 गंभीर क्षति), और KC-135 टैंकर (जमीन पर ईरानी हमलों या दुर्घटनाओं में 7 क्षतिग्रस्त या नष्ट) शामिल हैं. इसके अलावा AH-64, MH-60 जैसे कई हेलीकॉप्टर और E-3 AWACS भी इसकी चपेट में आए हैं.
इनमें से कई नुकसान ‘फ्रेंडली फायर’, तकनीकी दुर्घटनाओं या जमीन पर हुए हमलों का नतीजा भी हैं. लेकिन यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि आधुनिक युद्धक्षेत्र बदल रहा है. अब कम लागत वाले छोटे ड्रोन और अपेक्षाकृत सस्ते एयर-डिफेंस हथियार करोड़ों डॉलर के महंगे अमेरिकी सैन्य प्लेटफॉर्म्स के लिए सिरदर्द बन चुके हैं.
आज सवाल सिर्फ अमेरिकी विमानों की साख का नहीं, बल्कि बदलती युद्धनीति में उनकी रणनीतिक सफलता का है. अमेरिकी एयर पावर की असली परीक्षा अब विमानों की गिनती से नहीं, बल्कि उनकी सर्वाइवेबिलिटी (सुरक्षित रहने की क्षमता) और दुश्मन के एयर डिफेंस को भेदने की आधुनिक तकनीक से होगी.


