डेस्क: मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग (Mark Zuckerberg) ने भारत में प्लेटफॉर्म से जुड़ी कई शिकायतों को लेकर सरकार से माफी मांगी है। बुधवार को जकरबर्ग ने बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), डीपफेक कंटेंट और ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर खेद जताया। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने प्लेटफॉर्म पर कुछ तरह की सामग्री को बढ़ावा दिए जाने से जुड़ी गलतियों को भी स्वीकार किया।
कंटेंट को बढ़ावा देने पर उठे सवाल
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मेटा को यह स्पष्ट किया गया था कि वह केवल मध्यस्थ की भूमिका तक सीमित नहीं है, क्योंकि प्लेटफॉर्म पर किस उपयोगकर्ता को कौन-सी सामग्री दिखाई जाएगी, इसमें उसकी भूमिका रहती है। सूत्रों ने बताया कि मेटा को सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण को लेकर भी सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, मेटा प्रमुख ने कुछ खास तरह की सामग्री को बढ़ावा देने के लिए भुगतान किए जाने की बात स्वीकार की और इस संबंध में माफी मांगते हुए अपनी गलती पर खेद जताया।
आईटी मंत्रालय ने कानूनों के पालन पर दिया जोर
इससे पहले आईटी मंत्रालय ने मेटा समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारत के स्थानीय कानूनों का पालन करने की बात स्पष्ट की थी। सरकार की ओर से प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और उनके कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े नियमों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया।
वहीं, संसदीय समिति ने फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पोस्ट को कुछ समय के लिए ब्लॉक किए जाने के मामले में मार्क जकरबर्ग से तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने को कहा था। समिति की ओर से यह भी कहा गया था कि निर्धारित समय में माफी नहीं मांगे जाने पर भारत में मेटा को मिलने वाले ‘सेफ हार्बर प्रोटेक्शन’ पर असर पड़ सकता है।
मेटा की ओर से सामने आया यह माफीनामा ऐसे समय में आया है, जब भारत में सोशल मीडिया कंपनियों की कंटेंट मॉडरेशन नीतियों, डीपफेक और आपत्तिजनक सामग्री को लेकर उनकी जवाबदेही पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।


