डेस्क : गणेश चतुर्थी का पावन पर्व इस साल 14 सितंबर 2026 से शुरू हो रहा है और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन किया जाएगा। इस दौरान भक्त घरों और पंडालों में बप्पा की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा करते हैं। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला देवता माना जाता है। पूजा में उन्हें मोदक, दूर्वा और अन्य प्रिय चीजें अर्पित की जाती हैं। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं में कुछ ऐसी वस्तुओं का भी उल्लेख मिलता है जिन्हें गणेश पूजा में अर्पित करने से बचने की सलाह दी जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की परंपराएं अलग हो सकती हैं, इसलिए इन्हें धार्मिक मान्यता के तौर पर ही समझना चाहिए। आइए जानते हैं किन चीजों को गणपति पूजा में चढ़ाने से बचा जाता है।
तुलसी न चढ़ाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी को तुलसी अर्पित नहीं की जाती। इसके पीछे एक पौराणिक कथा बताई जाती है, जिसमें तुलसी और गणेश जी से जुड़ा प्रसंग आता है। इसी वजह से गणेश पूजा में तुलसी दल का प्रयोग वर्जित माना जाता है।
केतकी का फूल
गणेश पूजा में केतकी के फूल को भी अर्पित न करने की मान्यता है। धार्मिक परंपराओं में इस फूल को लेकर पौराणिक प्रसंग जुड़े हुए हैं। इसलिए गणपति की पूजा के लिए ताजे और पूजा के लिए उपयुक्त फूलों का ही इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
टूटे हुए चावल
गणेश जी को अक्षत यानी साबुत चावल अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा में टूटे या खंडित चावल इस्तेमाल न करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा सामग्री साफ और पूर्ण होनी चाहिए। गणपति पूजा में अक्षत अर्पित करते समय इस बात का ध्यान रखा जा सकता है।
सूखे या मुरझाए फूल
भगवान की पूजा में ताजे फूल अर्पित करने की परंपरा है। इसलिए गणेश जी को मुरझाए, बासी या खराब फूल चढ़ाने से बचना चाहिए। पूजा सामग्री को स्वच्छ और ताजा रखना धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है।
सफेद वस्त्र और अन्य सफेद सामग्री
कुछ धार्मिक मान्यताओं में गणेश जी की पूजा के दौरान सफेद रंग की कुछ वस्तुओं को अर्पित करने से बचने की सलाह दी जाती है और पीले या लाल रंग को अधिक शुभ माना जाता है। हालांकि, इस संबंध में अलग-अलग परंपराएं मिलती हैं, इसलिए अपने परिवार की पूजा-पद्धति और स्थानीय मान्यता को प्राथमिकता देना उचित है।
सफेद चंदन को लेकर भी अलग मान्यताएं
कुछ परंपराओं में गणेश जी को पीला चंदन अर्पित करने की मान्यता है, जबकि सफेद चंदन से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, यह नियम सभी परंपराओं में एक जैसा नहीं है। इसलिए पूजा करते समय अपने परिवार की मान्यताओं या किसी विद्वान की सलाह का पालन करना बेहतर रहेगा।
पूजा में सबसे जरूरी है श्रद्धा
गणेश उत्सव का मूल भाव भगवान गणेश की श्रद्धा और भक्ति से पूजा करना है। पूजा सामग्री को लेकर मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए किसी वस्तु को लेकर डरने के बजाय अपनी पारिवारिक परंपरा और पूजा-विधि का सम्मान करना सबसे उचित है।

