दरभंगा

लनामिवि, दरभंगा के एनएसएस कोषांग द्वारा दरभंगा जिला के 200 स्वयंसेवकों का ‘युवा आपदा मित्र आवासीय प्रशिक्षण शिविर’ दूसरे दिन जारी

प्रशिक्षण शिविर में स्वयंसेवकों ने ‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन’ के विभिन्न उपायों की विस्तार से प्राप्त की जानकारी

दरभंगा:ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के एनएसएस कोषांग द्वारा बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के सौजन्य से विश्वविद्यालय परिसर स्थित जुबिली हॉल में सात दिवसीय आवासीय युवा आपदा मित्र प्रशिक्षण शिविर दूसरे दिन जारी रहा। शिविर का प्रारंभ राष्ट्रगीत एवं एनएसएस लक्ष्य-गीत से एवं समापन राष्ट्रगान से हुआ। आज के शिविर का शुभारंभ एनएसएस के कार्यक्रम समन्वयक- प्रथम सह शिविर संयोजक डॉ आर एन चौरसिया ने किया। उन्होंने प्रशिक्षुओं को आपदा प्रबंधन के महत्त्वों की विस्तार से जानकारी देते हुए जीवन में अनुशासन एवं पढ़ाई के महत्व को रेखांकित किया। इस अवसर पर एसडीआरएफ के प्रशिक्षक रूपेश कुमार पासवान, पंकज कुमार, राजू कुमार, संतोष कुमार, पूजा कुमारी, मिथिलेश तिवारी, भू-संपदा पदाधिकारी डॉ कामेश्वर पासवान, डॉ सुनीता कुमारी, कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ सुधांशु कुमार एवं डॉ अनुपम प्रिया, पीजी क्रीड़ा परिषद् के अध्यक्ष डॉ प्रियंका राय, एमआरएम कॉलेज, दरभंगा की एनसीसी पदाधिकारी डॉ नीलम सेन, मनीष राज, मुकेश कुमार झा, मणिकांत ठाकुर, अक्षय कुमार झा, अमित कुमार झा, संजय कुमार महतो, वैभव झा, रवीन्द्र कुमार सिंह, पंकज कुमार, सुमित कुमार के साथ ही 200 स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
आज के प्रशिक्षण में रूपेश कुमार पासवान, पंकज कुमार, राजू कुमार, पूजा कुमारी आदि प्रशिक्षकों ने स्वयंसेवकों को बाढ़ के कारण, प्रभाव एवं बचाव के उपायों, बाढ़ के दौरान पानी शुद्ध करने के तरीके, बाढ़ से बचाव के लिए स्थानीय स्तर पर चारपाई, ट्यूब, ड्रम, वॉटर बोतल, फुटबॉल, केला-पेड़, सूखे नारियल, बंद जार, थर्मोकोल तथा टिन आदि से राफ्ट (नाव) बनाना सिखाया गया। पानी में डूबे हुए व्यक्ति को बचाने के विभिन्न तरीके यथा- रस्सी फेंककर, जमीनपर लेटकर, मानव श्रृंखला बनाकर, धोती-साड़ी आदि फेंक कर बचाने कर तरीकों की जानकारी दी गई। वहीं डूबने वाले व्यक्ति के पेट से पानी निकालने की विभिन्न विधियां की विस्तार से जानकारी दी गई। अगले सत्र में मानव शरीर की सामान्य जानकारियां यथा- शरीर का तापमान, नाड़ी-धड़कन की दर, श्वसन-दर तथा दिल की धड़कन आदि जानकारी देते हुए स्वस्थ एवं अस्वस्थ व्यक्तियों की पहचान भी बताया गया। प्रत्येक तकनीकी सत्र के बाद छात्र-छात्राओं के प्रश्न लिए गए, जिनका समुचित उत्तर प्रशिक्षकों ने बताया। अंत में दस छात्र-छात्राओं से दिन भर के प्रशिक्षण का सार-संक्षेप प्रस्तुत करवाया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *