अजब-गजब

अंतरिक्ष में दिखा दुर्लभ नजारा, रहस्यमयी गोले में विस्फोट के साथ 1 घंटे में 114 धमाके देख साइंटिस्ट भी हैरान

डेस्क: भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में एक बेहद दुर्लभ न्यूट्रॉन स्टार की आक्रामक गतिविधि रिकॉर्ड की है. पुणे स्थित जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप यानी जीएमआरटी के डेटा से पता चला है कि पीएसआर जे1227-4853 नाम के एक खास पल्सर ने महज 60 मिनट के भीतर 114 अत्यधिक चमकीले जायंट पल्स छोड़े हैं.

यह पल्सर कोई साधारण तारा नहीं है, बल्कि अपनी अवस्था बदलने वाला एक बेहद रेयर ट्रांजिशनल मिलीसेकंड पल्सर है. इस तरह के तारे पूरे ब्रह्मांड में उंगलियों पर गिने जा सकते हैं. ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में पब्लिश हुई इस रिसर्च ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में तहलका मचा दिया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अनोखी खोज ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक, फास्ट रेडियो बर्स्ट्स की गुत्थी सुलझाने की चाबी बन सकती है.

 

दुर्लभ पल्सर से क्यों उड़ रहे हैं वैज्ञानिकों के होश?

 

न्यूट्रॉन स्टार किसी बड़े तारे के खत्म होने के बाद बचने वाला बेहद घना अवशेष होते हैं. जब यह तारा अपनी धुरी पर बहुत तेजी से घूमता है, तब इसे मिलीसेकंड पल्सर कहा जाता है.

 

यह महज 30 मिलीसेकंड से भी कम समय में अपना एक पूरा चक्कर लगा लेता है. हमारा यह खास पल्सर तो सिर्फ 1.69 मिलीसेकंड में एक रोटेशन पूरा कर लेता है. इसका मतलब यह एक सेकंड में कई सौ बार घूम जाता है.

इस तारे की सबसे अनोखी बात इसका गिरगिट जैसा स्वभाव है. यह एक ट्रांजिशनल मिलीसेकंड पल्सर है, जो अपनी दो अलग-अलग अवस्थाओं के बीच लगातार बदलता रहता है.

कभी यह एक्स-रे सिस्टम की तरह व्यवहार करता है, तो कभी अचानक रेडियो पल्सर बन जाता है. पूरे ब्रह्मांड में अब तक ऐसे सिर्फ तीन तारों की ही पुष्टि हो पाई है. भारतीय वैज्ञानिकों की टीम इसी तीसरे सिस्टम की बारीकी से पड़ताल कर रही थी.

महज 60 मिनट में 114 महाविस्फोट, आखिर तारे के अंदर ऐसा क्या घटा?

 

नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स यानी एनसीआरए के साइंटिस्ट सप्तरर्षि सरकार और उनकी टीम ने जीएमआरटी के 174 घंटों के डेटा का गहन एनालिसिस किया. इस रिसर्च में करीब पांच सालों का डेटा खंगाला गया.

 

रेडियो तरंगों के बैकग्राउंड शोर को हटाने के बाद साइंटिस्ट्स को 235 असली जायंट पल्स मिले. ये पल्स आम सिग्नल्स के मुकाबले दस हजार गुना ज्यादा चमकदार और ताकतवर थे.

सबसे बड़ा कौतूहल 6 दिसंबर 2020 के ऑब्जर्वेशन में देखने को मिला. उस दिन इस पल्सर ने अचानक अपना भयानक रूप दिखाया. इसने महज एक घंटे के भीतर 114 जायंट पल्स उगल दिए.

यह दर इतनी तेज थी कि डेटा मॉनिटर कर रहे वैज्ञानिक भी सन्न रह गए. ये धमाके महज एक माइक्रोसेकंड यानी सेकंड के दस लाखवें हिस्से जितने छोटे थे, लेकिन इनसे निकलने वाली एनर्जी ने सबको हैरत में डाल दिया.

तारे के किन दो हॉट स्पॉट्स से निकल रही थी यह जानलेवा ऊर्जा?

 

रिसर्च टीम ने पाया कि ये सभी सिग्नल बेतरतीब तरीके से नहीं आ रहे थे. ये इस पल्सर के खास दो हॉट स्पॉट्स से ही निकल रहे थे. इसका मतलब साफ है कि पल्सर के मैग्नेटिक एनवायरनमेंट में कुछ बेहद खास और सीमित इलाके हैं, जहां से यह ऊर्जा बाहर फूटती है.

इन दोनों स्पॉट्स में भी काफी बड़ा फर्क देखने को मिला. पहले स्पॉट से निकलने वाले पल्स बेहद संकरे और दूसरे के मुकाबले बहुत ज्यादा चमकीले थे. उनकी चौड़ाई महज 1.28 माइक्रोसेकंड मापी गई.

 

वैज्ञानिकों का मानना है कि दोनों जगहों पर एनर्जी पैदा होने का मैकेनिज्म बिल्कुल अलग हो सकता है. इस तरह का आक्रामक व्यवहार आज तक किसी भी ट्रांजिशनल पल्सर में नहीं देखा गया था.

 

फास्ट रेडियो बर्स्ट्स का रहस्य सुलझने की उम्मीद

 

इस खोज का सीधा संबंध फास्ट रेडियो बर्स्ट्स यानी एफआरबी से जुड़ रहा है. एफआरबी अंतरिक्ष से आने वाली रहस्यमय रेडियो तरंगे हैं, जो पलक झपकते ही गायब हो जाती हैं. आज तक कोई नहीं समझ पाया कि ब्रह्मांड में बार-बार फटने वाले ये सिग्नल आखिर कहां से आते हैं.

 

वैज्ञानिकों ने पाया कि इस पल्सर से निकलने वाले पल्स का पैटर्न रिपीटिंग एफआरबी से काफी मेल खाता है. जिस तरह से 1 घंटे में 114 पल्स निकले, वह ठीक उसी तरह का क्लस्टरिंग बिहेवियर दिखाता है जैसा गहरे अंतरिक्ष के एफआरबी दिखाते हैं. साइंटिस्ट्स का कहना है कि यह समानता एफआरबी के बनने की प्रक्रिया को डिकोड करने में एक सुराग साबित हो सकती है.

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