डेस्क: पटना। राज्य में गंगा नदी रौद्र रूप दिखाने के बाद अब इसका उफान कम होने लग है। गंगा का जलस्तर घटने लगा है। संभावना है कि अगले कुछ दिनों में स्थिति तेजी सामान्य होगी। उक्त बातें उपमुख्यमंत्री व जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कही।
सोमवार को जल संसाधन विभाग के सभाकक्ष में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि इस वर्ष बिहार में बाढ़ का स्वरूप पिछले वर्षों से अलग रहा। आमतौर पर नेपाल से आने वाली नदियों बागमती, कमला, कोसी और गंडक में पहले बाढ़ आती थी और इसके बाद गंगा का जलस्तर बढ़ता था।
उन्होंने कहा कि इस बार इसके विपरीत सबसे पहले गंगा में ही बाढ़ की स्थिति बनी। जलवायु परिवर्तन समेत कई संभावित कारणों के बीच गंगा ने कई स्थानों पर पिछले सभी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर इस बार 50.58 मीटर तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष तक का उच्चतम स्तर 50.52 मीटर था। हालांकि जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन की मुस्तैदी के कारण पटना शहर सुरक्षित रहा। गंगा के दूसरी ओर दियारा क्षेत्र के निचले इलाकों में पानी फैला, जहां प्रशासन की ओर से राहत एवं सहायता कार्य लगातार जारी हैं।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि पुनपुन और दरधा नदियों ने भी इस बार गंभीर चुनौती पेश की। पुनपुन में पिछले रिकॉर्ड से अधिक जलस्तर दर्ज किया गया। जबकि, दरधा नदी भी अपने अब तक के उच्चतम जलस्तर तक पहुंच गई। इन नदियों में झारखंड क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण पानी आया है।
उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर पुराने लघु बांध और जमींदारी बांधों के ऊपर से पानी बहा। विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर रिसाव और छोटे कटाव को तत्काल नियंत्रित किया।
उन्होंने कहा कि राज्य में बने वैज्ञानिक एवं विभागीय तटबंध सुरक्षित हैं। किसी प्रमुख और आधुनिक तटबंध में कहीं बड़ा ब्रीच नहीं हुआ है। भागलपुर के खरीक प्रखंड में गंगा की धारा बदलने जैसी गंभीर स्थिति बनी थी, लेकिन जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने दिन-रात निगरानी और लगातार प्रयास कर तटबंध को सुरक्षित रखा। इससे नवगछिया क्षेत्र के रिहाइशी इलाकों को बड़े नुकसान से बचाया जा सका।
गंगा के बाद पुनपुन व दरधा नदी का नीचे आएगा पानी
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि गंगाजी का जलस्तर घटना शुरू हो गया है। 50.58 मीटर के उच्चतम स्तर के बाद यह घटकर करीब 50.40 मीटर पर पहुंच गया है। इलाहाबाद और वाराणसी की ओर भी जलस्तर में गिरावट का रुझान है। गंगाजी का पानी और घटने पर पुनपुन और दरधा जैसी नदियों की जल निकासी भी बेहतर होगी। इनका जलस्तर तेजी से नीचे आने की उम्मीद है।
कोसी, गंडक बागमती जैसी प्रमुख नदियों में जलस्तर नियंत्रित रहने से स्थिति को संभालने में बड़ी मदद मिली। यदि इन नदियों में भी सामान्य वर्षों की तरह भारी उफान आता तो हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते थे।
बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत कार्य शुरू
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सरकार की ओर से राहत कार्य जारी हैं। राहत शिविरों में भोजन, स्वास्थ्य सुविधा, पशुओं के लिए अलग व्यवस्था और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। किसानों की फसल क्षति समेत अन्य आवश्यक सहायता देने की प्रक्रिया भी जारी है।

