बिहार

मधुबनी में जन्मे, दरभंगा में बीताया जीवन, कौन हैं आइआइटी गुवाहाटी अंतिम सत्र के छात्र प्रियांशु?

डेस्क: दरभंगा।दरभंगा की एक पानीपुरी की दुकान पर खड़े करीब 18-19 साल के एक लड़के को अचानक उसके मेंटर का फोन आया। जेईई की आंसर-की आए कई दिन हो चुके थे, लेकिन प्रियांशु कुमार ने अब तक अपना स्कोर चेक नहीं किया था। उन्हें लगा था कि खाली दोपहर है तो क्यों न पानीपुरी खाई जाए। तभी फोन बजा और दूसरी तरफ उनके मेंटर थे।

कुछ देर बाद उन्हें जो बात पता चली उसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। मेंटर ने कहा – “बन गए तुम IITian”

यही वह फोन कॉल था, जिससे प्रियांशु को पता चला कि उनका चयन आईआईटी गुवाहाटी के लिए हो गया है। खास बात यह थी कि यह खबर उन्हें किसी कोचिंग सेंटर, घर या किसी रिजल्ट वेबसाइट से नहीं, बल्कि अपने शहर दरभंगा की सड़क किनारे पानीपुरी की दुकान पर मिली।

आज प्रियांशु कुमार आईआईटी गुवाहाटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र हैं और उनकी उम्र करीब 21 साल है। मूल रूप से वह बिहार के मधुबनी के रहने वाले हैं, लेकिन उनका ज्यादातर जीवन दरभंगा में बीता है। इसलिए वह खुद को दिल से दरभंगा का ही मानते हैं।

मधुबनी में जन्म, दरभंगा में बीता ज्यादातर जीवन

प्रियांशु मूल रूप से मधुबनी बिहार से हैं, लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा दरभंगा में बिताया है। यही वजह है कि दरभंगा उनके लिए सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि घर जैसा है। उनके पिता पुलिस सेवा में हैं जबकि मां गृहिणी हैं।

प्रियांशु की स्कूली पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम के एक स्कूल से हुई। वह स्कूल दरभंगा और मधुबनी पूरे क्षेत्र का इकलौता आईसीएसई स्कूल था। प्रियांशु को स्कूल से मिली उस मजबूत नींव ने आगे की पढ़ाई में उनकी काफी मदद की।

घर से दूर आईआईटी पहुंचने के बाद उन्हें सबसे ज्यादा किसी चीज की कमी महसूस हुई तो वह उनका शहर नहीं, बल्कि उनके दोस्त थे। दरभंगा में छह दोस्तों का उनका एक ग्रुप था। यह दोस्ती इतनी पुरानी थी कि साथ बिताई यादों के लिए तस्वीरों की जरूरत नहीं पड़ती।

JEE की तैयारी के लिए पटना पहुंचे

प्रियांशु की आईआईटी की यात्रा आसान नहीं थी। उन्होंने जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड की तैयारी पटना के एक कोचिंग से की। वहां बिताए दो साल उनके जीवन के सबसे अहम दौर में शामिल रहे। हालांकि इन दो वर्षों में उन्होंने सिर्फ जेईई का सिलेबस ही नहीं पढ़ा। पहली बार उन्हें माता-पिता से दूर रहना पड़ा।

दरभंगा से पटना पहुंचे प्रियांशु शुरुआत में काफी शर्मीले थे लेकिन दो साल बाद जब वह पटना से निकले तो उनमें काफी आत्मविश्वास आ चुका था।

11वीं में पढ़ाई शानदार रही, 12वीं में मुश्किलें बढ़ीं

प्रियांशु के मुताबिक उनकी 11वीं कक्षा लगभग बिल्कुल वैसी रही जैसी वह चाहते थे। वह अच्छी तरह पढ़ते थे, पर्याप्त नींद लेते थे और टेस्ट में भी ठीक-ठाक नंबर आते थे लेकिन 12वीं में परिस्थितियां बदल गईं। उनके फैकल्टी बदल गए और वह नए शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके के साथ ठीक से तालमेल नहीं बैठा पाए। धीरे-धीरे बैकलॉग बढ़ने लगा। इसके साथ उनका आत्मविश्वास भी कम होने लगा।

प्रियांशु के लिए JEE एक मैराथन था, स्प्रिंट नहीं

प्रियांशु के मुताबिक जेईई की तैयारी को समझने के लिए सबसे सही उदाहरण मैराथन है। प्रियांशु ने जेईई मेन में ऑल इंडिया रैंक 7,457 हासिल की, जबकि जेईई एडवांस्ड में उनकी ऑल इंडिया रैंक 3,863 रही।

CSE नहीं मिली तो खुद से पूछा- आखिर पढ़ना क्या चाहता हूं?

जेईई एडवांस्ड में मिली रैंक ऐसी नहीं थी कि उन्हें टॉप आईआईटी में कंप्यूटर साइंस आसानी से मिल जाती। इसलिए उन्होंने खुद से एक सीधा सवाल किया कि अगर सीएसई नहीं तो फिर ऐसा क्या है, जिसमें उनकी वास्तव में दिलचस्पी है? उन्हें मैकेनिकल इंजीनियरिंग इसलिए भी पसंद आई क्योंकि इसमें उन्हें इंजीनियरिंग की चीजें ज्यादा वास्तविक लगती थीं।

31 जुलाई 2023 को शुरू हुआ IIT गुवाहाटी का सफर

31 जुलाई 2023 प्रियांशु के लिए बेहद खास दिन था। यही उनका आईआईटी गुवाहाटी में पहला दिन था। जब उन्होंने पहली बार आईआईटी गुवाहाटी का मुख्य प्रवेश द्वार देखा तो उन्हें अंदर से एक अलग तरह की खुशी महसूस हुई।

IIT में पहली बार मिला जिंदगी का पहला Zero

आईआईटी पहुंचने के बाद प्रियांशु को पढ़ाई में भी एक ऐसा अनुभव हुआ, जिसकी उन्होंने शायद कल्पना नहीं की थी। पहले ही सेमेस्टर में गणित के एक विषय में उन्हें अपनी जिंदगी का पहला जीरो मिला। बाद में प्रियांशु को लगा कि शायद आईआईटी का यह भी एक सबक था – असाधारण काम करने के लिए खुद को हर समय असाधारण मानना जरूरी नहीं है।

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