नई दिल्ली साहित्य

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेंट की ‘नवभारत का न्याय दर्शन’

नईदिल्ली/ब्यूरो:

अधिवक्ता एवं लेखक सुमित कुमार मिश्र ने की मुलाकात, वकालत के दिनों से लेकर राष्ट्रपति भवन तक की यात्रा पर हुई चर्चा

नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पत्रकार, अधिवक्ता एवं लेखक सुमित कुमार मिश्र ने मुलाकात कर अपनी पुस्तक ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ भेंट की। न्याय, संविधान और विधि के शासन जैसे विषयों पर केंद्रित इस पुस्तक को कोविंद को सौंपना विशेष रहा। स्वयं कोविंद का सार्वजनिक जीवन भी कानून और न्याय के क्षेत्र से शुरू होकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचा।

मुलाकात के दौरान रामनाथ कोविंद ने अपने वकालत के दिनों की स्मृतियां साझा कीं। दिल्ली में अधिवक्ता के रूप में उनके कार्यकाल, दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जुड़े कानूनी अनुभवों पर भी बातचीत हुई।

आधिकारिक जीवनवृत्त के अनुसार, रामनाथ कोविंद ने वर्ष 1971 में दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया था। वर्ष 1977 से 1979 तक वह दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के अधिवक्ता रहे। वर्ष 1978 में वह सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकार्ड बने। 1980 से 1993 तक उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता के रूप में कार्य किया।

वकालत से राष्ट्रपति भवन तक का सफर

बातचीत में रामनाथ कोविंद की उस यात्रा का भी उल्लेख हुआ, जो एक अधिवक्ता के रूप में शुरू होकर संसद, बिहार के राज्यपाल और अंततः देश के 14वें राष्ट्रपति के पद तक पहुंची। उन्होंने 25 जुलाई 2017 को राष्ट्रपति पद की शपथ ली और 25 जुलाई 2022 तक इस पद पर रहे।

मुलाकात के दौरान बिहार से जुड़ी पुरानी स्मृतियां भी ताजा हुईं। बिहार के राज्यपाल रहने के दौरान सुमित कुमार मिश्र की प्रभात झा के साथ रामनाथ कोविंद से हुई मुलाकातों का भी उल्लेख हुआ। पुनौराधाम में मां सीता मंदिर निर्माण से जुड़ी पुरानी गतिविधियों और उस समय किए गए प्रयासों पर भी चर्चा हुई। इस दौरान कोविंद के सहयोग से जुड़ी पुरानी बातों को याद किया गया।

एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर भी चर्चा

मुलाकात के दौरान ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से जुड़े रामनाथ कोविंद के दायित्व का भी उल्लेख हुआ। केंद्र सरकार ने संसद और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के विषय पर समीक्षा और सिफारिशों के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता रामनाथ कोविंद को सौंपी थी। समिति ने इस विषय पर अपनी रिपोर्ट भी केंद्र सरकार को सौंपी थी।

आम नागरिक तक न्याय पहुंचाने पर जोर

‘नवभारत का न्याय दर्शन’ के विषय और रामनाथ कोविंद के विधिक अनुभवों के बीच भी समानता दिखाई देती है। अपने सार्वजनिक जीवन में कोविंद न्याय को आम नागरिक तक सुलभ बनाने की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। वकालत के दौरान उन्होंने नई दिल्ली की फ्री लीगल एड सोसाइटी के माध्यम से गरीबों, महिलाओं और कमजोर वर्गों को नि:शुल्क कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई।

न्याय, संविधान और राष्ट्र निर्माण पर केंद्रित है पुस्तक

सुमित कुमार मिश्र की पुस्तक ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ न्याय को केवल अदालत और कानूनी धाराओं तक सीमित न रखकर भारतीय समाज, संविधान, शासन और राष्ट्र निर्माण के व्यापक संदर्भ में देखने का प्रयास करती है। पुस्तक में भारतीय न्याय परंपरा, संवैधानिक मूल्य, नागरिक अधिकार एवं कर्तव्य, विधि का शासन और आम नागरिक तक न्याय की पहुंच जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई है।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पुस्तक भेंट किए जाने का यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा कि पुस्तक का विषय और उनका सार्वजनिक जीवन दोनों ही न्याय, कानून और संविधान से गहराई से जुड़े रहे हैं। अधिवक्ता के रूप में अदालत से लेकर राष्ट्रपति के रूप में संविधान के सर्वोच्च पद तक की उनकी यात्रा भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून और संविधान की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।

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