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ट्रंप के खिलाफ रुख पर PM मार्क कार्नी को जनता का समर्थन, तीनों उपचुनाव में लिबरल पार्टी की बड़ी जीत

डेस्क: कनाडा में प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी ने तीन सीटों पर हुए विशेष चुनावों में जीत हासिल की है। इन नतीजों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्यापार विवाद के बीच कार्नी सरकार के रुख के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि लिबरल पार्टी ने क्यूबेक की वह सीट भी विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी से छीन ली, जो 2018 से उसके पास थी। कनाडा की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी द कैनेडियन प्रेस के अनुसार, लिबरल पार्टी ने क्यूबेक की चिकोटिमी-ले फियोर्ड, टोरंटो की बीचेज-ईस्ट यॉर्क और ब्रिटिश कोलंबिया की नॉर्थ वैंकूवर-कैपिलानो सीट पर जीत दर्ज की है। प्रधानमंत्री कार्नी ने इन नतीजों को अपनी सरकार की नीतियों पर जनता के भरोसे के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि कनाडा के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण समय है और ऐसे समय में मतदाताओं ने उनकी सरकार की योजना पर भरोसा जताया है।
तीनों सीटों में सबसे बड़ा उलटफेर क्यूबेक की चिकोटिमी-ले फियोर्ड सीट पर हुआ। यहां लिबरल उम्मीदवार डैनियल गोबील ने जीत हासिल की। यह सीट 2018 से कंजर्वेटिव पार्टी के पास थी। इस इलाके में एल्युमिनियम उद्योग, डेयरी फार्म और कई अन्य उद्योग हैं। अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे व्यापार विवाद का इन क्षेत्रों पर सीधा असर पड़ रहा है। गोबील ने जीत के बाद कहा कि यह परिणाम पूरे कनाडा में एकता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।  राजनीति के जानकारों के मुताबिक, क्यूबेक में लिबरल पार्टी की इस जीत का संबंध कार्नी के उस फैसले से भी हो सकता है, जिसमें उन्होंने 21 अगस्त को अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया था।

चिकोटिमी-ले फियोर्ड में कंजर्वेटिव पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। पिछले साल हुए चुनाव में पार्टी को इस सीट पर करीब 34 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन सोमवार के उपचुनाव में उसका वोट शेयर घटकर करीब 13 प्रतिशत रह गया और वह तीसरे स्थान पर पहुंच गई। मैकगिल यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डैनियल बेलां ने इसे कंजर्वेटिव नेता पियरे पोइलिवर के लिए खराब संकेत बताया। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े पार्टी के लिए चिंता पैदा करने वाले हैं।

कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापार संबंध इस समय तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता 21 अगस्त को उस समय टूट गई, जब कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के करीब 20 अरब अमेरिकी डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया। कनाडा ने भी अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाने की योजना बनाई है। इसके साथ ही ट्रंप लगातार कनाडा को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं। वह कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। हाल ही में ट्रंप ने कनाडा के साथ अपनी तनातनी के बीच लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने के आदेश पर भी हस्ताक्षर किए। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को कहा कि इस व्यापार विवाद में कनाडा के पास सीमित विकल्प हैं, क्योंकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था कनाडा की अर्थव्यवस्था से लगभग 13 गुना बड़ी है।
ट्रंप के साथ बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री मार्क कार्नी कनाडा की अर्थव्यवस्था को अमेरिका पर कम निर्भर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए उनकी सरकार यूरोप और दूसरे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने पर जोर दे रही है। तीन उपचुनावों में जीत के बाद संसद में लिबरल पार्टी की स्थिति भी मजबूत हुई है। इन नतीजों के बाद 343 सदस्यीय हाउस ऑफ कॉमन्स में लिबरल पार्टी के पास 173 सीटें हो जाएंगी। ये तीनों उपचुनाव उन सांसदों के इस्तीफे के बाद कराए गए थे, जो इससे पहले इन सीटों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

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