सिवान। डेस्क: ब्लैकबोर्ड, चॉक और किताबों की नीरस दुनिया से इतर अगर किसी सरकारी स्कूल के कमरों से गणित के सूत्रों पर रचे गीतों और नाटकों की गूंज सुनाई दे, तो समझ लीजिए कि आप पचरुखी के राजकीयकृत मध्य विद्यालय मटुकछपरा में हैं।
कागजी दावों से अलग, जमीनी पड़ताल में प्रभारी प्रधानाध्यापक श्रीकांत का क्रिएटिव टीचिंग मॉडल सरकारी शिक्षा की नई तस्वीर पेश करता है। वे गणित और विज्ञान जैसे कठिन विषयों को गीत, संगीत और नाटक के जरिए बच्चों के दिमाग में उतार देते हैं।
इसी नवाचार के दम पर उन्होंने ”चहक” वर्ग एक-दो और ”पल्लव व उद्भव” वर्ग तीन-आठ के लिए राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभाई।
उनके बनाए टीचिंग लर्निंग मटीरियल के कारण उन्हें बेस्ट टीएलएम पर्सन चुना गया और पांच सितंबर 2025 को बिहार के तत्कालीन शिक्षा मंत्री द्वारा राजकीय शिक्षक सम्मान से नवाजा गया।
बिना चारदीवारी वाले स्कूल में रुकता नहीं बच्चों का उत्साह:
पचरुखी के राजकीयकृत मध्य विद्यालय मटुकछपरा सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग 227-ए से सटा हुआ है। सुरक्षा के लिहाज से शिक्षकों का एक विशेष रूटीन बनाया गया है, जो बच्चों को सुरक्षित सड़क पार कराते हैं।
ताज्जुब की बात यह है कि स्कूल की कोई पक्की चारदीवारी नहीं है। फिर भी बच्चे कभी परिसर छोड़कर बाहर नहीं भागते। अगर किसी को छुट्टी चाहिए, तो वह बाकायदा इजाजत मांगकर ही जाता है।
विद्यालय परिसर में चिप्स, कुरकुरे या अन्य अनहेल्दी जंक फूड खाने पर पूरी तरह पाबंदी है। श्रीकांत ने बच्चों में स्वच्छता और स्वास्थ्य को लेकर ऐसी चेतना जगाई है कि बच्चे खुद ही घर का खाना पसंद करते हैं।
नवाचार का नतीजा, मैदान से लेकर मेधा तक अव्वल बच्चे
शिक्षक का यह जुनून सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण छात्रों के नतीजों में दिखता है। इस विद्यालय के बिंदु तिवारी व कृष्णाजी तिवारी इंस्पायर अवार्ड 2022-23, बिंदु ने रामानुजन टैलेंट सर्च परीक्षा में जिले में चौथा स्थान, धनु कुमार व अमन कुमार ने तरंग प्रतियोगिता लंबी व ऊंची कूद में जिले में प्रथम स्थान पाया।
वहीं, सतीश कुमार व गोलू कुमार राष्ट्रीय आय सह मेधा छात्रवृत्ति में चयन के साथ स्कूल की पूरी टीम प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग में लगातार तीन वर्षों से जिले में प्रथम स्थान हासिल किया है।
सात बच्चों से सफर शुरू करने वाले श्रीकांत आज हेडमास्टर का पद संभालने के बावजूद रोजाना खुद क्लासरूम में जाकर बच्चों को पढ़ाते हैं। उनकी यही लगन मटुकछपरा मध्य विद्यालय को पूरे जिले के लिए एक रोल मॉडल बना रही है।
तीन जुलाई 2000 को जब दारौंदा के रसूलपुर में योगदान दिया, तब 10 धुर में बने एक कमरे में केवल सात बच्चे थे। कुर्सी और पीने का पानी पड़ोसी के घर से आता था। निजी खर्च से कुर्सियां व ग्लास खरीदे और टीलएलएम के जरिए पढ़ाई को मजेदार बनाया। इससे छात्र संख्या पहले ही साल 62 और तीसरे साल 125 पहुंच गई। – श्रीकांत, प्रभारी प्रधानाध्यापक
शिक्षकों की नजर में श्रीकांत:
बिना चारदीवारी के भी विद्यालय में अनुशासन बना रहना उनकी मेहनत और निगरानी का परिणाम है। – अर्चना कुमारी शिक्षक, मध्य विद्यालय मटुकछपरा
बच्चों की प्रतियोगी परीक्षाओं और खेलों में उपलब्धियां उनकी मेहनत का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। – संतोष प्रजापति शिक्षक, मध्य विद्यालय मटुकछपरा
बच्चों को गणित-विज्ञान गीत, संगीत और गतिविधियों से समझाना उनकी खासियत है। उनके प्रयोग से बच्चे सीखने में रुचि लेते हैं। – उषा कुमारी, शिक्षक, मध्य विद्यालय मटुकछपरा

