दरभंगा: दरभंगा के आगामी शिक्षक एवं स्नातक MLC चुनाव में इस बार राजनीतिक समीकरण पहले से काफी अलग नजर आ सकते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के अनुभव से सबक लेते हुए प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी को उम्मीदवार चयन और जमीनी रणनीति पर विशेष ध्यान देना होगा।
अगर उनकी पार्टी स्वर्ण समाज से किसी मजबूत उम्मीदवार को मैदान में उतारती है, तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। खासकर यूजीसी के मुद्दे को लेकर स्वर्ण मतदाताओं के एक हिस्से में BJP के प्रति नाराजगी की चर्चा के बीच यह वोट समीकरण महत्वपूर्ण हो सकता है।
इस पूरे समीकरण में बांकीपुर विधानसभा चुनाव के ‘हिडन हीरो’ कहे जाने वाले डॉ. प्रभाकर झा जैसे युवा चेहरे की भूमिका भी चर्चा में आ सकती है। युवाओं के बीच उनकी पहचान और सामाजिक सक्रियता उन्हें एक संभावित प्रभावशाली चेहरा बनाती है।
वहीं पूर्व MLC डॉ. दिलीप चौधरी अपने अनुभव और पुराने राजनीतिक संपर्कों के कारण महत्वपूर्ण नाम हैं। शिक्षक MLC के लिहाज से डॉ. मदन मोहन झा का शिक्षक वर्ग में अनुभव और पकड़ भी मुकाबले को खास बनाती है।
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशांत किशोर अपने पिछले विधानसभा चुनाव से क्या सबक लेते हैं और क्या दरभंगा MLC चुनाव में नए सामाजिक एवं युवा समीकरण को साधने की कोशिश करते हैं।
क्योंकि राजनीति में एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए,ओवरकॉन्फिडेंस कभी-कभी सबसे मजबूत किले की दीवार में भी सेंध लगा देता है।
इस बार यूजीसी का मुद्दा, स्वर्ण मतदाताओं का रुख, युवा वर्ग, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और विभिन्न सामाजिक वर्गों का समर्थन,दरभंगा MLC चुनाव की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण फैक्टर हो सकते हैं।
आशुतोष झा

