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BJP के बाद संघ में भी पीढ़ीगत बदलाव की तैयारी, Gen-Z फोकस बढ़ेगा, मोहन भागवत के पद पर बदलाव की चर्चा नहीं

डेस्क: भाजपा (BJP) में संगठनात्मक बदलाव के बाद अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में भी अगले साल बड़े परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है। पार्टी ने अपनी नई टीम में युवा नेतृत्व (Youth Leadership) को अधिक स्वतंत्रता देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। माना जा रहा है कि इसी के साथ संघ भी बदलती सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप अपनी कार्यशैली और संगठन में नई पीढ़ी की भूमिका बढ़ा सकता है। हालांकि, संघ प्रमुख के पद में बदलाव को लेकर फिलहाल कोई चर्चा नहीं है।
भाजपा की नई टीम में युवाओं के साथ अनुभवी नेताओं को भी जगह दी गई है। युवा अध्यक्ष नितिन नवीन को फैसले लेने में स्वतंत्र भूमिका दी गई है, जबकि वरिष्ठ नेताओं की भूमिका मार्गदर्शन और जरूरत के मुताबिक सलाह देने तक सीमित रहने की संभावना है। संगठन में इस बदलाव का उद्देश्य नई पीढ़ी को नेतृत्व की जिम्मेदारी देना और पार्टी को बदलते राजनीतिक-सामाजिक माहौल के अनुरूप तैयार करना बताया जा रहा है।
हर दशक में भाजपा बदलती रही है संगठन का ढांचा
भाजपा के 1980 में गठन के बाद लगभग हर दशक में संगठन में बदलाव देखने को मिले हैं। 20वीं सदी के अंतिम दशक में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने 1992 से 1995 के बीच बड़ी संख्या में युवाओं को पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी थीं। इनमें नरेंद्र मोदी भी प्रमुख चेहरों में शामिल थे।
21वीं सदी के पहले और दूसरे दशक में भी पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव हुए। उस दौरान वरिष्ठ नेताओं का नई टीम पर प्रभाव और मार्गदर्शन अधिक रहा। हालांकि, मौजूदा बदलाव में नई पीढ़ी को निर्णय लेने की ज्यादा स्वतंत्रता देने पर जोर दिखाई दे रहा है।

युवा नेतृत्व के साथ वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन
सूत्रों के मुताबिक, इस बार भाजपा के संगठन में नेतृत्व भी युवा है और निर्णय लेने की शक्ति भी उसी के पास रखी गई है। वरिष्ठ नेता संगठन को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संगठन को मजबूती देने के लिए सक्रिय भूमिका में रहेंगे।
अगले साल संघ में भी बदलाव के संकेत
भाजपा में हुए संगठनात्मक बदलाव के बाद अब संघ में भी अगले साल कुछ अहम परिवर्तन होने की संभावना जताई जा रही है। कॉकरोच प्रोटेस्ट के बाद संघ और भाजपा दोनों स्तरों पर Gen-Z को लेकर फोकस बढ़ने की बात सामने आ रही है। संघ के शताब्दी वर्ष के बाद नई पीढ़ी को संगठन से जोड़ने और उसकी भूमिका बढ़ाने के संकेत भी मिले हैं।
माना जा रहा है कि आने वाले समय में Gen-Z और Gen-Alpha के बीच बदलते सामाजिक माहौल को ध्यान में रखते हुए संगठन अपनी कार्यशैली और युवा भागीदारी पर ज्यादा जोर दे सकता है। ऐसे में भाजपा के साथ संघ भी नई पीढ़ी के साथ कदमताल करता नजर आ सकता है।
मोहन भागवत के पद पर बदलाव की चर्चा नहीं
हालांकि संघ में संभावित बदलाव के बीच सरसंघचालक के पद को लेकर फिलहाल कोई चर्चा नहीं है। मोहन भागवत 2009 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख हैं। संघ में सरसंघचालक का चुनाव नहीं होता। इस पद का निर्धारण आम सहमति से किया जाता है। मौजूदा सरसंघचालक किसी नाम का सुझाव देते हैं और उसके आधार पर संगठन में सहमति बन सकती है। इसलिए फिलहाल बदलाव की चर्चा संघ की कार्यशैली और नई पीढ़ी की भूमिका को लेकर ज्यादा है, न कि सरसंघचालक के पद को लेकर।

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