अंतरराष्ट्रीय

जयशंकर से यूक्रेन के विदेश मंत्री की फोन पर बातचीत, काला सागर में जहाजों की सुरक्षा पर हुई चर्चा

डेस्क: यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा (Andriy Tsibiha) ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने काला सागर की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और यूक्रेनी बंदरगाहों तथा समुद्री मार्गों पर बढ़ते हमलों के बारे में जानकारी दी। दोनों नेताओं ने काला सागर में जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बहाल करने के उपायों पर चर्चा की।

सिबिहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बातचीत की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि उन्होंने जयशंकर को काला सागर में बनी गंभीर स्थिति से अवगत कराया। यूक्रेनी विदेश मंत्री के मुताबिक, रूस के साथ जारी संघर्ष के बीच यूक्रेन के बंदरगाहों और समुद्री मार्गों पर हमले बढ़े हैं।
खाद्य निर्यात को लेकर यूक्रेन ने जताई चिंता
बातचीत के दौरान सिबिहा ने यूक्रेन से होने वाले खाद्य निर्यात का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस यूक्रेन के खाद्य निर्यात को बाधित करने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, इसका असर केवल यूक्रेन और आसपास के क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
यूक्रेन दुनिया के प्रमुख कृषि निर्यातकों में शामिल है और काला सागर उसके अनाज तथा अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ऐसे में इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय खाद्य आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जाती रही है।

जयशंकर और सिबिहा ने काला सागर में जहाजों की सुरक्षित और स्वतंत्र आवाजाही दोबारा शुरू करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों के बीच इस बात पर भी चर्चा हुई कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
इसके अलावा भारत और यूक्रेन के बीच द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के मुद्दे पर भी बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने साझा हितों से जुड़े विषयों पर आगे संपर्क और सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई।

आगे भी संपर्क में रहेंगे दोनों देश
यूक्रेनी विदेश मंत्री ने बताया कि बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने भविष्य में होने वाली वार्ताओं और संपर्क को लेकर भी सहमति बनाई। जयशंकर और सिबिहा ने आपसी संपर्क बनाए रखने तथा द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच काला सागर की सुरक्षा और समुद्री व्यापार लगातार महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। भारत दोनों पक्षों के साथ अपने कूटनीतिक संपर्क बनाए रखते हुए क्षेत्रीय शांति और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करता रहा है।

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