डेस्क: बिहार (Bihar) के नवगछिया के राघोपुर में गंगा नदी (Ganga River) का उफान राहत और बचाव कार्य में जुटे मजदूरों (Workers) के लिए मुसीबत बन गया। तटबंध की मरम्मत के लिए बालू लेकर जा रही नाव तेज धारा की चपेट में आकर पलट (boat capsized) गई। नाव पर 21 मजदूर सवार थे। हादसे के बाद 19 लोग किसी तरह सुरक्षित निकल आए, जबकि 2 मजदूर अभी लापता हैं। SDRF की टीम दोनों की तलाश में गंगा में सर्च ऑपरेशन चला रही है।
हादसे का वीडियो भी सामने आया है। इसमें दिखाई दे रहा है कि तटबंध के कटाव वाले हिस्से पर फ्लड फाइटिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान तेज बहाव में नाव असंतुलित होकर पलट गई। नाव में मौजूद मजदूरों ने पानी में छलांग लगाकर जान बचाने की कोशिश की। कुछ लोग तैरकर किनारे पहुंचे, जबकि SDRF की टीम ने भी रेस्क्यू कर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
भंवर में फंसी नाव, दो लोग लापता
चश्मदीद वेदानंद कुमार के अनुसार, नाव को किनारे लाने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन तेज धारा उसे फिर बीच नदी की ओर खींच ले गई। इसी दौरान नाव पलट गई। नाव में मजदूरों के अलावा दो मांझी भी मौजूद थे।
हादसे के बाद बादल मंडल और मांझी सिकंदर मंडल लापता हैं। बादल मंडल भागलपुर के लोदीपुर और सिकंदर मंडल नवगछिया के तीनटंगा के रहने वाले बताए गए हैं। SDRF दोनों की तलाश कर रही है।
DM ने माना, लाइफ जैकेट के निर्देश में हुई चूक
DM अलंकृता पांडे ने बताया कि मौके पर मौजूद SDRF टीम ने 19 मजदूरों को बचा लिया, जबकि दो लोग अभी लापता हैं। शुरुआती तौर पर नाव के पलटने की वजह नदी में बना भंवर मानी जा रही है।
उन्होंने कहा कि मजदूरों को लाइफ जैकेट पहनने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसमें चूक हुई। मामले में संबंधित वेंडर्स के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी। नावों से काम फिलहाल रोक दिया गया है और सुरक्षा कार्य के लिए ट्रैक्टरों का इस्तेमाल किया जाएगा।
तटबंध टूटने से मंत्री के घर समेत सैकड़ों मकान डूबे
राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध दो दिन पहले सुबह करीब 3 बजे टूट गया था। यह स्थान बिहार के ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल के आवास से करीब 300 मीटर की दूरी पर है। तटबंध टूटने के बाद मंत्री के घर समेत आसपास के सैकड़ों मकानों में बाढ़ का पानी घुस गया।
इसी टूटे हिस्से को बंद करने और रिस्टोरेशन के लिए मजदूर लगाए गए थे। जल संसाधन विभाग ने तटबंध की मरम्मत और कटाव रोकने के लिए 300 से ज्यादा मजदूरों को काम पर लगाया है। बालू की बोरियां, बांस-बल्लियां और हाथी पांव लगाकर नदी के दबाव को कम करने की कोशिश की जा रही है।
खतरे के निशान से 27 सेंटीमीटर ऊपर गंगा
गंगा का तेज करंट और लगातार दरकती मिट्टी मरम्मत कार्य में परेशानी पैदा कर रही है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान 33.68 मीटर से बढ़कर 33.95 मीटर पहुंच गया है। हालांकि, फरक्का बराज के सभी फाटक खोल दिए गए हैं। इससे आने वाले दिनों में गंगा का जलस्तर घटने की उम्मीद जताई जा रही है।

