डेस्क: नेपाल (Nepal) के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी (Bhotekoshi River) में भीषण बाढ़ (great flood) से भारी तबाही देखने को मिली है. नेपाल में आए इस विनाशकारी फ्लैश फ्लड में करीब 163 लोगों की मौत हो चुकी है और 750 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों का परिवहन और संपर्क ढांचा भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं, जिससे कई इलाकों का संपर्क बाधित हो गया है।
इस घटना में 13 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है और कई वाहन तेज बहाव की चपेट में आ गए। नेपाल सेना ने प्रभावित इलाकों से 250 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला है। नेपाल में कई लोग अब भी लापता हैं. इनमें 139 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
इस बीच, नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार में भी प्रशासन अलर्ट पर है। गंडक, नारायणी और कोसी नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है।यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर समेत बिहार के संवेदनशील इलाकों में प्रशासन को अलर्ट किया गया है।
गृह मंत्रालय समेत कई केंद्रीय मंत्रालय लगातार स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। बिहार के 6 जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस मुश्किल घड़ी में भारत के लोग नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं।
साउथएशियन कल्चरल इवेंट्स खोजना
नेपाल के भोटेकोशी बाढ़ की चपेट में आने से विभिन्न कमर्शियल बैंक की नौ शाखाएं बह गईं। नेपाल बैंकर्स एसोसिएशन ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने ये भी बताया कि रसुवा में इन शाखाओं में काम करने वाले लगभग 26 कर्मचारियों से भी संपर्क नहीं हो पाया है। एसोसिएशन का कहना है कि टेलीफोन लाइनें खराब होने और बिजली न होने के कारण संपर्क करने में दिक्कतें आ रही हैं। एसोसिएशन के अनुसार, रसुवा में माछापुछ्रे, नबिल, सनिमा, लक्ष्मी सनराइज, हिमालयन, प्रभु, ग्लोबल आईएमई, इन्वेस्टमेंट मेगा और एनएमएबी बैंक की शाखाएं थीं। कान्तिपुर टाइम्स ने बताया कि बैंकर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष कोइराला ने जानकारी दी कि इन शाखाओं में काम करने वाले 26 कर्मचारियों से अभी तक संपर्क नहीं हो सका है।
बुधवार तड़के अचानक नेपाल की भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ा और उसने बाढ़ का रूप ले लिया। देखते ही देखते कई पुल, प्रोजेक्ट्स और इमारतें भरभरा कर गिरने लगीं। पुलिस अलग-अलग जिलों में बाढ़ की चपेट में आने वाले घरों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही है, विभिन्न एजेंसियों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर ज़रूरी बचाव और खोज अभियान चला रही है, और कई जगहों पर रास्ते की रुकावटें हटा रही है।
रसुवा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य के लिए काठमांडू हवाई अड्डे से 49 बचाव उड़ानें भरी गईं। काठमांडू हवाई अड्डे पर स्थित आरसीसी कार्यालय के अनुसार, बुधवार शाम 5:20 बजे तक निजी और सरकारी हेलीकॉप्टरों ने धुंचे, तिमुरे, स्याफ्रुबेसी, मैलुंग, त्रिशूली और धाडिंग इलाकों में बचाव और राहत पहुंचाने के लिए उड़ान भरी। वहीं, इस विपत्ति में भारत ने पड़ोसी देश की हर मुमकिन मदद का आश्वासन दिया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाली समकक्ष बालेंद्र शाह से फोन पर बात की और कहा, ‘इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। हमारी टीमें बचाव और राहत कार्यों के लिए मिलकर काम कर रही हैं।’

