पटना: नगर निगम के अधीन लीज पर आवंटित 3,631 संपत्तियों को मालिकाना हक देने का रास्ता गुरुवार को साफ होगा। निगम पर्षद की विशेष बैठक में इन संपत्तियों को फ्री होल्ड करने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी और इसे मंजूरी दी जाएगी।
इसके बाद प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। इन संपत्तियों का आवंटन पहले पटना उन्नयन न्यास और बाद में पटना क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (पीआरडीए) ने लीज पर किया था। वर्ष 1960 से 1970 के बीच बड़ी संख्या में संपत्तियों का आवंटन हुआ था।
वर्तमान में ये संपत्तियां पटना नगर निगम के अधीन हैं। निगम के पास कुल 432.07 एकड़ जमीन में ऐसी संपत्तियां हैं।
निगम के अनुसार लीज पर दी गई संपत्तियों में 1,367 भूखंड, 806 भवन, 841 फ्लैट, 575 दुकान व कियोस्क, 37 कार्यालय, चार अतिथिशाला और एक ईंट भट्ठा शामिल हैं।
इनमें राजेंद्र नगर, श्रीकृष्णापुरी, पीआईटी कॉलोनी (कंकड़बाग), मौर्य लोक, परिवहन नगर और बेऊर सहित अन्य स्थित भूखंड, भवन, फ्लैट, दुकान-कियोस्क तथा कार्यालय शामिल हैं।
प्रस्ताव के अनुसार मूल आवंटी से संपत्ति के एमवीआर (मिनिमम वैल्यू रजिस्टर) का 10 प्रतिशत परिवर्तन प्रभार शुल्क लिया जाएगा।
वहीं, मूल आवंटी के अलावा अन्य आवंटियों से 12 प्रतिशत परिवर्तन प्रभार शुल्क लेकर लीज संपत्ति को फ्री होल्ड करने का प्रस्ताव है। हालांकि, अन्य आवंटियों के लिए शुल्क बढ़ाने की संभावना है। इस पर विशेष बैठक में चर्चा होगी।
बिना अनुमति 11 संपत्तियों की हुई खरीद-बिक्री
निगम के अनुसार 11 आवंटियों ने निगम की अनुमति के बिना लीज पर मिली संपत्तियों की खरीद-बिक्री की है। वहीं, म्यूटेशन से जुड़े नौ मामले न्यायालय में चल रहे हैं। इन मामलों को भी प्रस्ताव के दौरान ध्यान में रखा जाएगा।
अधूरे संलेख के कारण पिछली बैठक में नहीं मिली थी मंजूरी
14 अगस्त को हुई निगम पर्षद की 12वीं साधारण बैठक में भी लीज संपत्तियों को मालिकाना हक देने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, संलेख अधूरा होने के कारण उस समय प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी थी। अब संलेख पूरा होने के बाद गुरुवार की विशेष बैठक में प्रस्ताव को फिर से रखा जाएगा।

