डेस्क: चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने बंगाल चुनाव में कथित धांधली मामले में याचिकाकर्ता के एक दलील के दौरान कहा कि क्या यह कोर्ट चुनाव का निर्देश दे सकता है?
बेंच में शामिल जस्टिस जॉयमाल बागची ने कहा- मान लीजिए जीत का मार्जिन 50 है और उस विधानसभा में 100 वोटों के नाम काटे गए हैं. ट्रिब्यूनल सुनवाई के दौरान अगर 100 में से 70 वोटरों के नाम काटने को गलत मानता है तो स्थिति अलग हो जाएगी.
जस्टिस बागची ने आगे कहा कि एसआईआर में नाम काटने के खिलाफ ट्रिब्यूनल में अगर 70 लोग अपील भी कर रहे हैं तो भी यह मसला बड़ा है. वहीं मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने एक डेटा रिपोर्ट दाखिल की.
शंकरनायारणन के मुताबिक ट्रिब्यूनल ने एसआईआर में कटे 90 प्रतिशत नामों को सही पाया है. यह बेहद गंभीर मामला है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को डेटा दाखिल करने का निर्देश दिया है.
♦ वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन के मुताबिक एसाआईआर पर अब तक 83 हजार मामलों में ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला सुनाया है. इनमें से करीब 75 हजार मामलों में नाम काटने को गलत माना गया है. यानी 90 प्रतिशत नामों को सही पाया गया है. अगर इस डेटा को सैंपल मान लिया जाए तो मामला काफी गंभीर है.
♦ गोपाल शंकरनारायणन के मुताबिक बंगाल में कुल 38 लाख केस एसआईआर से संबंधित दाखिल किए गए हैं. इनमें 31 लाख केस नाम कटवाने वालों की तरफ से दाखिल किए गए हैं. 7 लाख केस नाम बचाने वालों की तरफ से दाखिल किए गए हैं. अभी तक सिर्फ 83 हजार मामलों में फैसला आया है.
♦ तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि बंगाल चुनाव में बीजेपी को 2 करोड़ 93 लाख वोट मिले हैं, जबकि टीएमसी को 2 करोड़ 60 लाख वोट मिले. यानी बीजेपी से टीएमसी को सिर्फ 30 लाख कम वोट मिले. वहीं 38 लाख केस एसआईआर को लेकर दाखिल है.
♦ तृणमूल कांग्रेस के सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी के मुताबिक 31 सीटें ऐसी हैं, जहां पर जीत का मार्जिन एसआईआर में कटे नामों से कम है. इनमें बाली, हेमताबाद, सतगछिया की सीटें प्रमुख है. तृणमूल का कहना है कि जो वोट कटे हैं, वो उनके समर्थक थे.
♦ इसी साल 23 अप्रैल को सुनवाई के दौरान जस्टिस जे बागची ने कहा था- मान लीजिए, अगर विधानसभा सीट पर जीत का मार्जिन 2 प्रतिशत रहता है और 15 प्रतिशत लोग वोट नहीं डाल पाते हैं तो ऐसी स्थिति में क्या हो सकता है? उन्होंने कहा कि इसे हमें देखना होगा.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि क्या यह अदालत नए सिरे से चुनाव का निर्देश दे सकती है? सूर्यकांत ने कहा कि इस पर विचार की जरूरत है. हालांकि, उन्होंने कहा कि पहले आप आवेदन दीजिए.
संविधान के अनुच्छेद 324 के मुताबिक चुनाव कराने का अधिकार निर्वाचन आयोग के पास है. वहीं किसी गठित सरकार को भंग करने का अधिकार राष्ट्रपति को है. अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति राज्यपाल की सिफारिश पर यह फैसला करते हैं.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के पास अनुच्छेद 142 के तहत संपूर्ण न्याय करने का अधिकार है. इसके तहत सुप्रीम कोर्ट कोई भी बड़ा फैसला ले सकता है, लेकिन अब तक इस तरह का कोई फैसला नहीं लिया गया है.
बंगाल चुनाव में एसआईआर का बवाल
चुनाव आयोग ने बंगाल चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची को नए सिरे से तैयार करने के लिए एसआईआर अभियान चलाया. तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि एसआईआर अभियान के तहत उनके लोगों के नाम काटे गए. चुनाव का जब रिजल्ट आया तो तृणमूल ने इसे बड़ा मुद्दा बताया.बंगाल चुनाव में बीजेपी को 294 में से 207 सीटों पर जीत मिली.
तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई. बंगाल में सरकार बनाने के लिए 148 विधायकों की जरूरत होती है.

