अंतरराष्ट्रीय

ISRO का बड़ा फैसला, लॉन्च व्हीकल और आम सेटेलाइट बनाने की जिम्मेदारी प्राइवेट सेक्टर के सुपुर्द

डेस्क: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आ रही है. ISRO अपने पारंपरिक काम जैसे लॉन्च व्हीकल (रॉकेट) और आम सैटेलाइट बनाने की जिम्मेदारी धीरे-धीरे करके प्राइवेट सेक्टर को सौंपने जा रहा है.

माना जा रहा है कि प्राइवेट सेक्र को लॉन्चिंग की कमान सौंपने के बाद ISRO एक रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) संगठन के रूप में काम करेगा, जो स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर ध्यान देगा.

 

ISRO अब रॉकेट और मिसाइल लॉन्च करने के काम से पीछे हटकर रिसर्च और नई तकनीक से साथ ही वैज्ञानिक मिशनों और बुनियादी ढाचों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करेगा. इससे माना जा रहा है कि ईसरो की भूमिका में पहले के मुकाबले अब एक बड़ा बदलाव आ सकता है.

 

प्राइवेट सेक्टर और निजी कंपनियों को सौंपी गई कमान

 

IN-SPACe के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका ने एक मीडिया संस्थान के कार्यक्रम में यह जानकारी दी कि रॉकेट और सैटेलाइट निर्माण का सारा काम अब निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है. इस नए बदलाव के तहत ‘स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल’ (SSLV) की टेक्नोलॉजी और प्रोडक्शन राइट्स एक बिडिंग प्रोसेस के ज़रिए ‘हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड’ (HAL) को सौंप दिए गए हैं. इस बदलाव का मकसद स्पेस सेक्टर को तेजी से आगे बढ़ाने से लेकर निजी कंपनियों की भागीदारी को भी आगे ले जाना रहेगा.

प्राइवेट सेक्टर में दी गई 120 तकनीकें

डॉ. पवन गोयनका के मुताबिक अब तक 120 तकनीकें प्राइवेट सेक्टर को ट्रांसफर कर दी हैं. देखा जाए तो यह बदलाव SSLV से शुरु हो चुका है. SSLV के बाद अब अगला बड़ा कदम PSLV और LVM3 को लेकर हो सकता है. LVM3 भारत का सबसे शक्तिशाली परिचालन रॉकेट है. उन्होंने बताया कि इन प्रक्षेपण यानों के मैन्युफैक्चरिंग को भी प्राइवेट सेक्टर की तरफ ले जाने की तैयारी है. इससे कमर्शियल मॉडल को बढ़ावा मिलेगा जहां प्राइवेट कंपनियां खुद की सैटेलाइट्स बनाकर डेटा और सर्विसेज के ज़रिए कमाई कर सकेंगी.

ISRO अब नहीं बनाएगा रॉकेट, निजी कंपनियों को सौंपी जाएगी लॉन्च व्हीकल की कमान, SSLV से हुई शुरुआत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *