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पाकिस्तान से आया अभिजीत दीपके के नाम खत, CJI सूर्यकांत के जिक्र से गरमाया मामला

डेस्क: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Deepke) को पाकिस्तान (Pakistan) के लाहौर (Lahore) से एक पत्र (Letter) मिला है। यह पत्र पाकिस्तानी युवा एक्टिविस्ट एहतेशाम हसन (Ehtesham Hasan) ने लिखा है। इसमें भारत और पाकिस्तान के युवाओं की समस्याओं, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं की आवाज जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया है। पत्र में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का भी उल्लेख है।

अभिजीत दीपके दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए अपने आंदोलन के बाद चर्चा में आए थे। उनकी पार्टी ने अब देशभर में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। इसी बीच पाकिस्तान से आए इस पत्र ने उनके आंदोलन को एक नया अंतरराष्ट्रीय संदर्भ दे दिया है।
लाहौर से लिखा गया पत्र
एहतेशाम हसन ने पत्र में खुद को लाहौर का युवा कार्यकर्ता बताते हुए भारत और पाकिस्तान के युवाओं की परिस्थितियों की तुलना की है। उन्होंने लिखा कि सीमा पार से अभिजीत के आंदोलन से जुड़ी खबरें देखकर उन्हें अपने हालात की झलक नजर आई।

पत्र में बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के सामने मौजूद चुनौतियों को दोनों देशों की साझा चिंता के तौर पर पेश किया गया है। हसन ने अभिजीत के आंदोलन को युवाओं की आवाज उठाने का माध्यम बताया है।
CJI सूर्यकांत का भी जिक्र
पत्र में मई में एक सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की कथित टिप्पणी का भी उल्लेख किया गया है। हसन ने लिखा कि बेरोजगार युवाओं के लिए ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने की खबर पाकिस्तान के युवाओं तक भी पहुंची और उन्होंने इसे अपने अनुभवों से जोड़कर देखा।
इसी कथित टिप्पणी के बाद अभिजीत दीपके ने अपने आंदोलन को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम दिया था। पत्र में हसन ने इसी कदम का जिक्र करते हुए कहा कि अभिजीत ने आलोचना को आंदोलन का रूप दे दिया।
भारत की आजादी और पाकिस्तान के युवाओं का दर्द

पाकिस्तानी एक्टिविस्ट ने अपने पत्र में भारत और पाकिस्तान के युवाओं के बीच अंतर का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि भारत में युवाओं को अपनी बात रखने और आलोचना करने के अधिक अवसर मिलते हैं, जबकि पाकिस्तान में ऐसी आजादी सीमित है।
हसन ने अभिजीत के आंदोलन को लेकर कहा कि पाकिस्तान के कुछ युवा इसे प्रेरणा के तौर पर देखते हैं। उन्होंने अभिजीत की डिजिटल पहुंच का जिक्र करते हुए लिखा कि अगर पाकिस्तान के युवाओं के पास भी ऐसा मंच होता, तो वे अपनी बात को बड़े स्तर तक पहुंचा सकते थे।
इस पत्र के सामने आने के बाद अभिजीत दीपके के आंदोलन को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। हालांकि, पत्र में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं और इन्हें पाकिस्तान सरकार या किसी आधिकारिक संस्था का रुख नहीं माना जा सकता।

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