अंतरराष्ट्रीय

ईरान की खाड़ी देशों को चेतावनी, US की मदद करना मतलब युद्ध में शामिल होना

डेस्क: ईरान (Iran) ने बुधवार को खाड़ी देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी सेना (us Army) को किसी तरह की भी मदद की तो इसे युद्ध में शामिल होना माना जाएगा। ईरानी सशस्त्र सेनाओं के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने कहा, खाड़ी देशों को अमेरिकी सैन्य बलों को मदद नहीं देनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्रीय ठिकानों पर तैनात सैन्य विमानों की मौजूदगी मेजबान देशों की जानकारी के बिना नहीं हो सकती। हम चेतावनी देते हैं अमेरिकी सेना को किसी भी तरह की मदद या सुविधा देना, अमेरिकी सैन्य बलों के साथ लड़ाई में शामिल होने के बराबर है।

अमेरिका ईरान युद्ध के खत्म होने के बाद खाड़ी देशों में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती में कटौती कर सकता है। बुधवार को एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, हमलों से क्षतिग्रस्त हुए बेस को फिर से बनाने या न बनाने पर भी विचार किया जाएगा।
मध्य पूर्व में तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही फिलहाल धीमी है। बुधवार को मिले आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को छह पोत इस मार्ग से गुजरे। यह संख्या एक दिन पहले के नौ और पिछले 10 दिनों के 11 जहाजों के औसत से कम थी। युद्ध से पहले, दुनिया के कुल कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) के शिपमेंट का पांचवां हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता था।
ईरान ने अमेरिका के साथ एक और अस्थायी संघर्ष विराम के प्रस्ताव को खारिज करते हुए युद्ध के ‘स्थायी अंत’ की मांग की है। गल्फ न्यूज ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट की है कि 60 दिनों के अंतरिम समझौते की समय सीमा समाप्त होने के बाद कूटनीतिक प्रयास ठप पड़े हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के 17 जून को हस्ताक्षरित इस्लामाबाद समझौता पत्र (एमओयू) में सैन्य अभियानों को तुरंत रोकने और अंतिम समझौते के लिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम एवं प्रतिबंधों जैसे प्रमुख मुद्दों पर बातचीत के लिए 60 दिनों की अवधि तय की गयी थी।
बिना किसी सफलता या समय सीमा बढ़ाये ही 17 अगस्त को यह अवधि समाप्त हो गई, जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस समझौते को ‘युद्ध का अंत, न कि संघर्ष विराम’ करार दिया है और कहा कि ईरान को अभी यह तय करना है कि सीधी बातचीत फिर से शुरू की जाए या नहीं। वहीं ईरानी संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने कहा कि होर्मुज तब तक बंद रहेगा, जब तक कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटा लेता, तेल प्रतिबंध नहीं हटाता, फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी नहीं करता और अपनी सैन्य धमकियों को समाप्त नहीं करता।

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