डेस्क: उत्तरप्रदेश (UP) के 68 जिलों में भारी बारिश (Heavy rain) के चलते गंगा, यमुना, राप्ती, सरयू, घाघरा और गोमती (Ganga, Yamuna, Ghaghara, and Gomti) जैसी प्रमुख नदियां उफान पर हैं। इन नदियों के प्रभाव वाले जिलों में बाढ़-से हालात उत्पन्न हो गए हैं और लाखों लोग बाढ़ में घिरे हुए हैं।
उत्तरप्रदेश प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 13 जिलों के करीब 173 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इससे लगभग 84,362 आबादी और 13,058 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। बाढ़ प्रभावित जिलों में बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव शामिल हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने से उनके कछार में सब्जियों की खेती पानी में डूब गई है। बाढ़ के हालात को देखते हुए कई जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं।
बाढ़ पर उत्तरप्रदेश कोर्ट का आदेश… प्रयागराज में 48 घंटे में पानी निकालो
प्रयागराज में लगातार तीसरे दिन की मूसलधार बरसात से दारागंज, मोरी गेट और करेली इलाके में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। लोगों के घरों में 5 फीट तक पानी भर गया। इन हालात पर हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में निर्देश दिए कि 24 से 48 घंटे में शहरी इलाकों से पानी निकल जाना चाहिए। उधर, मानसूनी बारिश से बांध और नदियां उफान पर हैं। सोनभद्र में पहली बार कनहर बांध के 14 फाटक एक साथ खोलने पड़े। छत्तीसगढ़ और झारखंड से लगातार पानी आने से बांध उफनाया है।
कानपुर के 176 गांवों में अलर्ट 100 से ज्यादा गोताखोर तैनात
कानपुर में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिले के करीब 176 गांवों को अलर्ट पर रखा गया है और 100 से ज्यादा गोताखोरों को तैनात किया गया है। यहां लोग शहर में नावों से आवाजाही कर रहे हैं। नदी के किनारे बसे निचले इलाकों में विशेष निगरानी की जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव टीमों को तैयार रखा गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों और निर्धारित शेल्टर होम में जाने की सलाह दी गई है। बाढ़ संभावित इलाकों में पांच स्थानों पर पुलिस पोस्ट स्थापित की गई हैं। इन स्थानों से नदी के किनारे और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है। घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है, ताकि किसी हादसे को समय रहते रोका जा सके। बाढ़ की स्थिति में राहत और बचाव कार्य के लिए 6 सदस्यीय एनडीआरएफ टीम को तैनात किया गया है। इसके अलावा एक पूरी फ्लड कंपनी और करीब 100 प्रशिक्षित गोताखोरों को भी तैयार रखा गया है। इन स्थानों पर रील बनाने वाले लोगों पर भी विशेष निगाह रखी जा रही है।

