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महंगाई बढ़ी तो RBI बढ़ा सकता है ब्याज!

महंगाई अभी नियंत्रण में दिखाई दे रही है… लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक ने जिस खतरे की ओर इशारा किया है, उसका असर सीधे आपकी जेब और आपके कर्ज की ईएमआई पर पड़ सकता है!

भारतीय रिजर्व बैंक की अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक के 19 अगस्त को जारी हुए विवरण में महंगाई को लेकर सावधानी बरतने की बात सामने आई है। RBI ने फिलहाल रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है, लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर महंगाई का दबाव बढ़ता है, तो आगे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।

दरअसल, जुलाई में भारत की उपभोक्ता महंगाई दर 4.45 प्रतिशत रही, जो RBI की 2 से 6 प्रतिशत वाली सहनशील सीमा के अंदर है। इसके बावजूद केंद्रीय बैंक खाने-पीने की चीजों, ईंधन और उत्पादन लागत बढ़ने से पैदा होने वाले महंगाई के दबाव को लेकर सतर्क है।

RBI की चिंता का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर है। अगर तेल महंगा होता है, तो परिवहन से लेकर उत्पादन तक कई चीजों की लागत बढ़ सकती है और इसका असर धीरे-धीरे आम आदमी की जेब तक पहुंच सकता है।

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत महंगाई का अनुमान 5 प्रतिशत किया है, जबकि आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किया गया है। यानी केंद्रीय बैंक एक तरफ अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर आशावादी है, लेकिन दूसरी तरफ महंगाई के दोबारा बढ़ने के जोखिम को नजरअंदाज नहीं कर रहा।

फिलहाल कोई नई ब्याज दर बढ़ोतरी नहीं हुई है। लेकिन RBI के ताजा संकेत साफ हैं—अगर महंगाई व्यापक रूप से बढ़ती है, तो ब्याज दरों पर सख्त फैसला लिया जा सकता है।

यानी अभी राहत है… लेकिन अगर महंगाई ने दोबारा रफ्तार पकड़ी, तो अगली चिंता सिर्फ बाजार की कीमतें नहीं, आपकी EMI भी हो सकती है!

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