डेस्क: महाराष्ट्र में धर्म परिवर्तन (Religious Conversion in Maharashtra) को लेकर नया कानून लागू होने जा रहा है। महाराष्ट्र विधानसभा (Maharashtra Legislative Assembly) से पारित धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 में जबरन, धोखे या दबाव के जरिए कराए गए धर्म परिवर्तन पर सख्त प्रावधान किए गए हैं। कानून में ऐसे विवाह या संबंध से जन्म लेने वाले बच्चे के धर्म, विरासत और अभिरक्षा को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है।
इस कानून के लागू होने के बाद महाराष्ट्र धर्म परिवर्तन को नियंत्रित करने वाला कानून बनाने वाला देश का 13वां राज्य बन जाएगा। कानून 28 अगस्त से प्रभावी होगा।
मां के धर्म को माना जाएगा बच्चे का धर्म
नए कानून के मुताबिक, यदि किसी विवाह या रिश्ते में धर्म परिवर्तन को गैर-कानूनी ठहराया जाता है और ऐसे संबंध से बच्चे का जन्म होता है, तो बच्चे का धर्म उस धर्म के आधार पर माना जाएगा, जिसे उसकी मां ने विवाह या संबंध से पहले माना था।
बच्चे को माता-पिता दोनों की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा। वहीं, अदालत की ओर से कोई अलग आदेश जारी नहीं होने तक बच्चे की कस्टडी मां के पास रहेगी।
दबाव या धोखे से हुई शादी हो सकती है अमान्य
कानून में यह प्रावधान भी किया गया है कि दबाव, धोखे या गैर-कानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से की गई शादी को अमान्य घोषित किया जा सकता है। शादी के जरिए या शादी का वादा करके किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराया जाता है और इसमें गैर-कानूनी तरीके अपनाए जाते हैं, तो उसे भी कानून के दायरे में रखा गया है।
धर्म बदलने से पहले 60 दिन का नोटिस
नए कानून के तहत धर्म परिवर्तन करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को जिला अधिकारी को 60 दिन पहले सूचना देनी होगी। धर्म परिवर्तन के बाद भी निर्धारित समय सीमा के भीतर इसकी जानकारी अधिकारी के पास दर्ज करानी होगी।
कानून के मुताबिक, धर्म परिवर्तन के बाद 25 दिनों के भीतर सूचना दर्ज नहीं कराने पर उसे अमान्य माना जा सकता है।
इसके अलावा धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति या संस्था को भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। समारोह के 21 दिनों के भीतर घोषणा-पत्र जमा नहीं करने पर धर्म परिवर्तन को अमान्य माना जा सकता है।
रिश्तेदार की शिकायत पर दर्ज होगी FIR
कानून में शिकायत की प्रक्रिया को भी कड़ा किया गया है। यदि धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति का कोई करीबी रिश्तेदार गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन का आरोप लगाकर शिकायत करता है, तो पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करनी होगी।
इतना ही नहीं, धर्म परिवर्तन कराने वाले आरोपी और इसमें मदद करने वाले व्यक्ति पर यह साबित करने की जिम्मेदारी होगी कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से और कानूनी तरीके से हुआ था।
बिना वारंट गिरफ्तारी, जमानत का भी प्रावधान नहीं
गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मामलों में पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है और अपराध को गैर-जमानती बनाया गया है। दोषी पाए जाने पर सात साल तक की सजा का प्रावधान है।
धर्म परिवर्तन की सार्वजनिक सूचना पर भी सवाल
कानून की प्रक्रिया को लेकर नागरिक अधिकार संगठनों ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं। प्रावधानों के अनुसार, धर्म परिवर्तन की सूचना मिलने के बाद संबंधित अधिकारी को उसे सार्वजनिक करना होगा और 30 दिनों के भीतर आपत्तियां मांगी जाएंगी।
इसके बाद प्रस्तावित धर्म परिवर्तन के उद्देश्य, परिस्थितियों और वजहों की पुलिस जांच कर सकती है। यदि जांच में धर्म परिवर्तन गैर-कानूनी पाया जाता है तो आपराधिक कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
विपक्ष और नागरिक समूहों ने किया विरोध
बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार की ओर से लाए गए इस कानून का विपक्ष और कुछ नागरिक संगठनों ने विरोध किया है। आलोचकों का कहना है कि इसके प्रावधान व्यक्ति की निजता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी पसंद से विवाह करने के अधिकार को प्रभावित कर सकते हैं।
आलोचना करने वाले संगठनों का यह भी तर्क है कि कानून का इस्तेमाल अलग-अलग धर्मों के बीच होने वाली शादियों में हस्तक्षेप या जोड़ों को परेशान करने के लिए किया जा सकता है।
राज्यपाल और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून तैयार
बिल को महाराष्ट्र विधानसभा के दोनों सदनों से पारित किए जाने के बाद 6 अप्रैल को राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मंजूरी दी थी। इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर 30 जुलाई को इसे राज्य के सरकारी गजट में प्रकाशित किया गया।
अब 28 अगस्त से इसके प्रावधान प्रभावी होंगे। इसके साथ ही महाराष्ट्र में गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में नई कानूनी व्यवस्था के तहत कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा।

