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असम के इन जिलों में बाहरी नहीं खरीद पाएंगे जमीन, 40 साल बाद बदला नियम

डेस्क: असम सरकार ने राज्य में में जमीनों की खरीद-बिक्री को लेकर बड़ा फैसला किया है. सरकार ने एक नया कानून बनाया है जो फिलहाल राज्य के गोवालपाड़ा, धुबरी और बारपेटा जिलों में लागू होगा. इस कानून के तहत खिलंजिया यानी असम के मूल निवासियों के अलावा कोई भी जमीन खरीद-बिक्री नहीं कर सकेगा.
जानकारी के मुताबिक पहले चरण में यह नियम असम के 3 जिलों में लागू होगा. इन जिलों में गोवालपाड़ा, धुबरी और बारपेटा शामिल हैं. खिलंजिया लोगों की जमीन की सुरक्षा के मद्देनजर राज्य की हिमंत सरकार ने ये बड़ा कदम उठाया है. राज्य में 40 साल बाद ये पहली बार है जब खिलंजिया लोगों के लिए इस तरह का बड़ा फैसला लिया गया है.
असम सरकार के इस फैसले के बाद अब इन तीन जिलों में जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर नए नियम लागू होंगे. इसस फैसले के पीछे सरकार का मसकद स्थानीय और मूल निवासियों की जमीन को सुरक्षित रखना बताया गया है. नए नियम के मुताबिक इन जिलों में अब वही लोग जमीन खरीद और बेच सकेंगे जो राज्य के मूल निवासी है इसके अलावा कोई और यहां ऐसा नहीं कर सकेगा.
इसके अलावा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार (17 अगस्त) को ब्रह्मपुत्र घाटी में रहने वाले लोगों से-जिनमें देश के दूसरे हिस्सों से आकर राज्य में बसे लोग भी शामिल हैं, उनसे अपील की कि वो जनगणना 2027 की प्रक्रिया के तहत चल रहे हाउसलिस्टिंग ऑपरेशन और हाउसिंग सेंसस में असमिया को अपनी मातृभाषा के तौर पर दर्ज कराएं.

गुवाहाटी में लोक सेवा भवन में मीडिया से बात करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि उन्होंने यह अपील 15 अगस्त को की थी, खासकर उन लोगों से जो दूसरे राज्यों से असम आए थे और दशकों से राज्य में रह रहे हैं.उन्होंने कहा कि आने वाली जनगणना 2027 ने इन लोगों को असम की पहचान के साथ घुलने-मिलने का मौका दिया है. इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि यह अपील बराक घाटी के निवासियों या मूल समुदायों पर लागू नहीं होती है.
मुख्यमंत्री ने असमिया को असम के अलग-अलग मूल समुदायों से जोड़ने वाली संपर्क भाषा बताया. उन्होंने कहा कि अगर मैं बोरो, मिसिंग या राभा समुदाय के किसी व्यक्ति से बात करता हूं, तो मैं असमिया में बात करूंगा. इसलिए मुझे असमिया भाषा के भविष्य की चिंता नहीं है और न ही इस बात की चिंता है कि कोई भाषा को लेकर हमें ब्लैकमेल करेगा. लेकिन इस जनगणना ने एक नया व्यापक सामूहिक समुदाय बनाने का मौका दिया है.
उन्होंने कहा कि यह अपील खासकर निचले असम (लोअर असम) के उन इलाकों के लिए अहम है, जहां अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि के लोग सालों से बसे हुए हैं. उन्होंने कहा ‘यह मुख्य रूप से निचले असम के लिए है, हर जिले में इसकी जरूरत नहीं है. जोरहाट में ऐसा कानून लाने की कोई वजह नहीं है क्योंकि वहां हर कोई असमिया है’. उन्होंने कहा कि सरकार निचले असम के चुनिंदा राजस्व क्षेत्रों, खासकर धुबरी, बारपेटा और गोलपारा पर ध्यान देगी.
सीएम सरमा ने इस प्रक्रिया को संवेदनशील इलाकों में ज़मीन की सुरक्षा की ज़रूरत से भी जोड़ा. उन्होंने कहा कि वहां जितनी जमीन है, उसे सुरक्षित रखने की ज़रूरत है.उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि असमिया को अपनी मातृभाषा के तौर पर दर्ज कराना पूरी तरह से स्वैच्छिक होगा.

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