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अमेरिका में नई कार की पूजा के दौरान स्वस्तिक बनाने से पंडित ने किया इनकार, भारतीय महिला ने बताई वजह

डेस्क: अमेरिका (America) में रहने वाली भारतीय मूल की एक महिला (Indian-Origin Woman) ने नई कार की पूजा का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें भारतीय परंपरा (Indian Tradition) और अमेरिका के सामाजिक माहौल का अनोखा मेल देखने को मिला। नई कार की पूजा के दौरान पंडित (Priest) ने बोनट पर भगवान गणेश की आकृति बनाई, ओम का प्रतीक बनाया, गंगाजल का छिड़काव किया और अन्य पारंपरिक रस्में पूरी कीं। हालांकि, जब कार पर स्वस्तिक (Swastika) बनाने की बात आई तो पंडित ने साफ इनकार कर दिया।
सारिका नाम की महिला ने अमेरिका में अपनी नई कार खरीदने के बाद पारंपरिक तरीके से पूजा कराने का फैसला किया था। करीब कुछ मिनट के वीडियो में पूजा की अलग-अलग रस्में दिखाई देती हैं। पंडित धोती-कुर्ता पहनकर पूजा कराते नजर आए। शुरुआत में कार के बोनट पर सिंदूर से गणेश जी की आकृति बनाई गई और उसके बाद फूल चढ़ाकर पूजा की गई।
पूजा के दौरान कार पर गंगाजल का छिड़काव भी किया गया। इसके बाद भारतीय परंपरा के अनुसार नींबू को कार के टायर के नीचे रखा गया और कार को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की रस्म पूरी की गई। अमेरिका में रहते हुए इस तरह की भारतीय परंपराओं को अपनी नई कार की पूजा में शामिल करना सारिका के लिए खास अनुभव रहा।
पूजा के दौरान सारिका ने पंडित से कार पर ओम और स्वस्तिक बनाने की इच्छा जताई। पंडित ने ओम का प्रतीक बनाने में कोई आपत्ति नहीं जताई और उसे कार के बोनट पर बना दिया। लेकिन स्वस्तिक बनाने की बात आते ही उन्होंने मना कर दिया। इसके पीछे धार्मिक आपत्ति नहीं, बल्कि अमेरिका में इस प्रतीक को लेकर होने वाली गलतफहमी और संभावित विवाद की आशंका बताई गई।
पश्चिमी देशों में स्वस्तिक को लेकर ऐतिहासिक कारणों से अलग तरह की धारणा मौजूद है। नाजी जर्मनी ने एक समान दिखने वाले प्रतीक का इस्तेमाल किया था, जिसके कारण अमेरिका और यूरोप के कई हिस्सों में लोग स्वस्तिक को नाजी विचारधारा से जोड़ सकते हैं। जबकि भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में स्वस्तिक का अर्थ और संदर्भ पूरी तरह अलग है।
भारतीय परंपरा में स्वस्तिक को शुभता, मंगल, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। घर, दुकान, वाहन या धार्मिक आयोजन की शुरुआत में इसे बनाना सामान्य धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। हिंदू धर्म के अलावा भारतीय संस्कृति की कई परंपराओं में भी इसका इस्तेमाल शुभ अवसरों पर किया जाता है।
अमेरिका जैसे देशों में रहने वाले भारतीय परिवारों के लिए यह अंतर कई बार व्यावहारिक चुनौती बन जाता है। धार्मिक प्रतीक का स्थानीय समाज में अलग अर्थ निकाला जा सकता है। इसी वजह से कुछ भारतीय परिवार सार्वजनिक रूप से कार या अन्य वस्तुओं पर स्वस्तिक बनाने से बचते हैं। इसके बजाय इसे कागज पर बनाकर वाहन के भीतर रखने या पूजा के बाद प्रतीक को हटा देने जैसे विकल्प अपनाए जाते हैं।

सारिका के लिए कार पूजा का अनुभव इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्हें अमेरिका में रहते हुए भारत की पारंपरिक रस्मों की झलक मिली। पूजा के लिए उन्होंने कुछ सामग्री खुद जुटाई, जबकि कुछ सामान पंडित अपने साथ लेकर आए। नारियल, फूल, गंगाजल और अन्य पूजा सामग्री के साथ पूरी रस्म भारतीय तरीके से संपन्न की गई।
वीडियो सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा स्वस्तिक को लेकर पंडित के फैसले की हुई। इस घटना ने यह भी दिखाया कि विदेशों में रहने वाले भारतीय अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखते हुए स्थानीय सामाजिक परिस्थितियों का ध्यान किस तरह रखते हैं। एक साधारण कार पूजा के दौरान सामने आया यह प्रसंग भारतीय प्रतीकों के अलग-अलग सांस्कृतिक अर्थों को समझने का अवसर भी देता है।

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