डेस्क: मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (Gajra Raja Medical College) से संबद्ध कमलाराजा अस्पताल (KRH) में बुधवार को जर्जर भवन के कारण एक बार फिर हादसा होते-होते बच गया। चिल्ड्रन वार्ड नंबर-3 की छत का प्लास्टर अचानक गिर गया। जिस समय यह घटना हुई, वार्ड में 16 बच्चे भर्ती थे। प्लास्टर का मलबा पलंग नंबर-19 पर गिरा, जहां दो माह की बच्ची भर्ती थी। मलबे के कुछ टुकड़े बच्ची को लगे, हालांकि उसे गंभीर चोट नहीं आई। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने सभी बच्चों को दूसरे वार्ड में स्थानांतरित कर दिया।
पलंग पर भर्ती थी दो माह की मासूम
जानकारी के अनुसार छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिरा और सीधे उस पलंग पर जा गिरा, जहां दो माह की बच्ची भर्ती थी। घटना से बच्ची के परिजन घबरा गए। बताया गया कि प्लास्टर के छोटे टुकड़े बच्ची तक पहुंचे और उसके कान में भी मलबा चला गया। हालांकि बच्ची सुरक्षित है और किसी गंभीर चोट की सूचना नहीं है।
16 बच्चों को दूसरे वार्ड में किया शिफ्ट
हादसे के बाद अस्पताल प्रबंधन ने चिल्ड्रन वार्ड नंबर-3 को तत्काल खाली कराया। यहां भर्ती सभी 16 बच्चों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। बच्चों के इलाज और निगरानी की व्यवस्था नए वार्ड में की गई है। घटना के बाद अस्पताल की भवन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
74 साल पुरानी है अस्पताल की इमारत
कमलाराजा अस्पताल की मौजूदा इमारत करीब 74 साल पुरानी बताई जा रही है। लंबे समय से इस्तेमाल में होने के कारण भवन के कई हिस्सों में मरम्मत की जरूरत बनी हुई है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से भवन की मरम्मत और पुरानी वायरिंग बदलने के लिए शासन को कई प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी है।
चार साल में 11 प्रस्ताव, फिर भी इंतजार
बताया गया है कि पिछले चार वर्षों में भवन की मरम्मत और वायरिंग बदलने के संबंध में शासन को करीब 11 प्रस्ताव भेजे गए हैं। इसके बावजूद जर्जर हिस्सों की समस्या पूरी तरह दूर नहीं हो सकी है। चिल्ड्रन वार्ड में प्लास्टर गिरने की घटना ने एक बार फिर इस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
2024 से अब तक करीब आठ हादसे
अस्पताल में जर्जर भवन से जुड़ी घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। वर्ष 2024 से अब तक करीब आठ ऐसे हादसे होने की जानकारी है, जिनमें छत और प्लास्टर गिरने की घटनाएं शामिल हैं। अकेले वर्ष 2026 में भी प्लास्टर गिरने की तीन घटनाएं सामने आने की बात कही जा रही है।
मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल
कमलाराजा अस्पताल ग्वालियर-चंबल अंचल का प्रमुख चिकित्सा केंद्र है। यहां ग्वालियर के अलावा आसपास के जिलों तथा उत्तर प्रदेश और राजस्थान से भी मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में भवन के जर्जर हिस्सों की समय रहते मरम्मत नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। बुधवार की घटना में बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन दो माह की बच्ची के पलंग पर मलबा गिरने से संभावित खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अस्पताल प्रबंधन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती जर्जर हिस्सों की पहचान कर उनकी तत्काल मरम्मत कराने की है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की स्थिति न बने।

