राष्ट्रीय

मुंबई में बारिश का कहर! कुर्ला में पहाड़ टूटा, घर मलबे में दबे

मुंबई में बारिश सिर्फ सड़कों पर पानी नहीं ला रही…
अब ये जिंदगियां निगल रही है!

बुधवार तड़के मुंबई के कुर्ला इलाके के चिराग नगर स्थित गौसिया चॉल में उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब भारी बारिश के बीच पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा।

मलबा सीधे वहां बने कुछ घरों पर जा गिरा और देखते ही देखते कई परिवार मलबे के नीचे दब गए।

हादसा करीब सुबह 3 बजकर 48 मिनट के आसपास हुआ—यानी वो वक्त, जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे। इसी वजह से लोगों को संभलने और बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल पाया।

शुरुआती जानकारी में दो लोगों की मौत और कई लोगों के मलबे में फंसे होने की बात सामने आई थी। लेकिन जैसे-जैसे रेस्क्यू ऑपरेशन आगे बढ़ा, मौत का आंकड़ा बढ़कर 6 तक पहुंच गया। कई लोग घायल भी हुए हैं।

घटना की गंभीरता को देखते हुए BMC, मुंबई फायर ब्रिगेड, पुलिस और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबे को हटाकर लोगों की तलाश शुरू की गई।

लेकिन राहत और बचाव अभियान के सामने एक बड़ी चुनौती भी हैl इलाके की संकरी गलियां, जिनकी वजह से भारी मशीनरी को घटनास्थल तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में रेस्क्यू टीमों को बेहद सावधानी से मलबा हटाना पड़ रहा है।

इस हादसे के बाद मुंबई में एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया है—

क्या हर साल आने वाली बारिश के लिए हमारी तैयारियां पर्याप्त हैं?

क्योंकि मुंबई में तेज बारिश के दौरान सिर्फ जलभराव ही खतरा नहीं है। पहाड़ी इलाकों और कमजोर ढलानों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए भूस्खलन, घर गिरने और मलबे में दबने का खतरा भी बढ़ जाता है।

BMC के अपने दस्तावेजों में भी मुंबई में कुछ इलाकों को landslide risk वाले क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया है और आपदा प्रबंधन के लिए BMC, NDRF और दूसरी एजेंसियों के बीच समन्वय की व्यवस्था बताई गई है।

हादसे के बाद मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने घटनास्थल का दौरा किया और मृतकों के परिवारों के लिए 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की। घायलों के लिए भी सहायता की घोषणा की गई है।

लेकिन सवाल सिर्फ मुआवजे का नहीं है।

सवाल ये है कि क्या अगली बारिश से पहले ऐसे संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया जाएगा?

क्योंकि जब आधी रात में पहाड़ घरों पर टूटता है, तो लोगों के पास बचने के लिए कुछ सेकंड भी नहीं होते।

मुंबई की बारिश हर साल आती है…
लेकिन अगर खतरे पहले से पहचाने जा चुके हैं, तो फिर हादसों का इंतजार क्यों?

ये सिर्फ एक लैंडस्लाइड नहीं, बल्कि शहर की मॉनसून तैयारियों के सामने एक बड़ा सवाल है।

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