डेस्क: सोशल मीडिया (Social media)आज दुनिया भर में लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है लेकिन अमेरिका में अब बच्चों और किशोरों(children and adolescents) पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता तेजी से बढ़ रही है। एक नए सर्वे के मुताबिक बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक सोशल मीडिया कंपनियों पर सरकार(strict government) की सख्त निगरानी और छोटे बच्चों को इन प्लेटफॉर्म से दूर रखने के लिए उम्र सत्यापन जैसे नियम लागू करने के पक्ष में हैं। खास तौर पर 16 साल से कम उम्र के बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच को लेकर अमेरिकी समाज में बहस तेज हो गई है।
रॉयटर्स और इप्सोस के सर्वे में करीब 61 फीसदी लोगों ने सोशल मीडिया कंपनियों के कामकाज पर ज्यादा सरकारी नियंत्रण की जरूरत बताई है। यह राय सिर्फ किसी एक राजनीतिक वर्ग तक सीमित नहीं है। सर्वे में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर कड़े नियंत्रण को लेकर उल्लेखनीय समर्थन दिखाई दिया। इससे संकेत मिल रहा है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा का मुद्दा अमेरिका में राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर गंभीर सार्वजनिक चिंता बनता जा रहा है।
सर्वे में करीब 66 फीसदी लोगों ने ऐसे कानूनों का समर्थन किया जिनके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को 16 साल से कम उम्र के बच्चों को प्लेटफॉर्म से दूर रखने के लिए एज वेरिफिकेशन व्यवस्था लागू करनी होगी। रिपब्लिकन समर्थकों में इस प्रस्ताव का समर्थन अपेक्षाकृत ज्यादा रहा जबकि डेमोक्रेट समर्थकों के बीच भी बड़ी संख्या में लोगों ने इसका समर्थन किया।
सबसे ज्यादा चिंता बच्चों में सोशल मीडिया की संभावित लत को लेकर सामने आई है। सर्वे में 85 फीसदी अमेरिकी नागरिकों ने माना कि सोशल मीडिया बच्चों में नशे जैसी आदत पैदा कर सकता है। लगभग इतनी ही संख्या में लोगों ने माना कि इसका इस्तेमाल बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यही वजह है कि अमेरिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उम्र की पाबंदी और निगरानी को लेकर मांग लगातार मजबूत हो रही है।
अमेरिकी अभिभावकों की चिंता का एक बड़ा कारण यह भी है कि बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए लगाए गए पैरेंटल कंट्रोल और ब्लॉकिंग सिस्टम को बच्चे कई बार दूसरे तरीकों से पार कर लेते हैं। ऐसे में कुछ माता पिता का मानना है कि केवल परिवार के स्तर पर निगरानी पर्याप्त नहीं है और टेक कंपनियों को भी बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
हालांकि दूसरी तरफ सोशल मीडिया के पक्ष में भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं। सर्वे में करीब 70 फीसदी लोगों ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिताया जाने वाला समय उन्हें मनोरंजक लगता है। वहीं लगभग 35 फीसदी लोगों ने इसे तनावपूर्ण बताया। इसका मतलब साफ है कि अमेरिकी समाज सोशल मीडिया को पूरी तरह खत्म करने के पक्ष में नहीं है बल्कि उसके इस्तेमाल को सुरक्षित और नियंत्रित बनाने की मांग ज्यादा मजबूत होती जा रही है।
इस बीच Meta समेत बड़ी टेक कंपनियों पर कानूनी दबाव भी बढ़ रहा है। आरोप लगाया गया है कि कुछ सोशल मीडिया प्रोडक्ट्स को इस तरह डिजाइन किया गया कि युवा यूजर्स लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बने रहें। Meta ने इन आरोपों से इनकार किया है और कंपनी का कहना है कि ऐसे मामलों में उस पर बेहद बड़ा आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है।
अमेरिका के कई राज्यों में नाबालिगों की सोशल मीडिया पहुंच को नियंत्रित करने वाले कानून भी बनाए गए हैं। दूसरी ओर Meta TikTok और Snap जैसी कंपनियों का समर्थन करने वाले टेक उद्योग समूह इन कानूनों को अदालतों में चुनौती दे रहे हैं। उनका तर्क है कि अनिवार्य उम्र सत्यापन और कुछ अन्य प्रतिबंध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल खड़े कर सकते हैं।
ऐसे में अमेरिका में बहस अब सोशल मीडिया को पूरी तरह प्रतिबंधित करने से ज्यादा बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित होती दिखाई दे रही है। आने वाले समय में अदालतों और सरकारों के फैसले यह तय कर सकते हैं कि टेक कंपनियों पर कितनी जिम्मेदारी डाली जाएगी और बच्चों की ऑनलाइन दुनिया को सुरक्षित बनाने के लिए कौन से नए नियम लागू होंगे।

