जिस परीक्षा के लिए हजारों युवाओं ने महीनों नहीं, सालों तक तैयारी की… अब उसी परीक्षा को सरकार ने रद्द करने पर सहमति दे दी है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती… क्योंकि छात्र अभी भी सड़कों पर हैं!
झारखंड में JPSC और दूसरी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।

सरकार 14वीं JPSC Combined Civil Services Preliminary Examination, इसके अलावा JPSC Backlog 2023 और Backlog 2025 की परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमत हुई है। यह फैसला छात्रों की तरफ से परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर उठाई गई आपत्तियों के बाद आया है।
दरअसल, झारखंड में पिछले कई दिनों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल—आखिर विवाद शुरू कैसे हुआ?
छात्रों ने JPSC की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। इसी बीच एक सफल अभ्यर्थी की OMR शीट की कार्बन कॉपी सामने आने के बाद भी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल और तेज हो गए। हालांकि, इन आरोपों की जांच और उनकी अंतिम जिम्मेदारी तय करना अलग प्रक्रिया है।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के कई दौर हुए। सरकार ने कई मांगों पर सहमति जताई, लेकिन CBI जांच समेत कुछ प्रमुख मांगों को लेकर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन सकी।
यही वजह है कि परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बावजूद छात्रों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। छात्रों ने अपनी बाकी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है और विधानसभा मार्च की भी तैयारी की गई।
वहीं, सरकार का कहना है कि छात्रों की ज्यादातर मांगों पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन प्रदर्शनकारी इस दावे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।
यानी झारखंड में JPSC का पेपर तो रद्द होने की राह पर है… लेकिन असली सवाल अब ये हैl क्या सिर्फ परीक्षा रद्द करने से अभ्यर्थियों का भरोसा वापस आएगा?
क्योंकि नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए एक परीक्षा सिर्फ एक पेपर नहीं होती… उसके पीछे सालों की मेहनत, समय और भविष्य की उम्मीदें जुड़ी होती हैं।
अब नजर इस बात पर होगी कि सरकार बाकी मांगों पर क्या फैसला लेती है और दोबारा होने वाली परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित की जाती है।
क्योंकि परीक्षा दोबारा हो सकती है… लेकिन युवाओं का खोया हुआ भरोसा दोबारा बनाना सबसे बड़ी चुनौती है।

