डेस्क: त्योहारों का मौसम शुरू होते ही हिंदू पंचांग (Hindu calendar)में व्रत और त्योहारों (Fasts and festivals)की लंबी श्रृंखला भी शुरू हो जाती है। खासकर महिलाओं के लिए आने वाले दिन काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि इस दौरान कई प्रमुख व्रत और उपवास पड़ते हैं। करवा चौथ से लेकर अहोई अष्टमी और जितिया (Ahoi Ashtami and Jitiya)के बाद छठ पूजा तक कई ऐसे अवसर आने वाले हैं जिनका धार्मिक और पारिवारिक महत्व माना जाता है। दशहरा दिवाली धनतेरस और भाई दूज जैसे प्रमुख त्योहार भी इसी दौरान पड़ेंगे।
सबसे पहले करवा चौथ का व्रत आएगा। विवाहित महिलाएं इस दिन पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार कई महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला उपवास करती हैं। शाम के समय करवा चौथ की पूजा की जाती है और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है। करवा चौथ को लेकर देश के अलग अलग हिस्सों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूजा की विधि में अंतर भी देखने को मिलता है।
इसके बाद अहोई अष्टमी का व्रत आता है। यह व्रत खास तौर पर संतान की सुख समृद्धि और लंबी आयु की कामना से जुड़ा माना जाता है। माताएं इस दिन उपवास रखकर अहोई माता की पूजा करती हैं। कई स्थानों पर तारों को देखकर व्रत खोलने की परंपरा है। अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं परिवार की सुख शांति और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं।
महिलाओं के प्रमुख व्रतों में जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत का भी विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से संतान की लंबी आयु और उनकी सुरक्षा की कामना के लिए रखा जाता है। कई क्षेत्रों में महिलाएं इस दिन कठिन उपवास करती हैं। खासकर बिहार झारखंड पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में जितिया व्रत को लेकर विशेष धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं हैं।
इसके बाद छठ पूजा का पर्व आता है जो केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है लेकिन इसमें महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। छठ व्रत में सूर्य देव और छठी मैया की उपासना की जाती है। व्रती महिलाएं और पुरुष दोनों ही कठोर नियमों का पालन करते हैं। इस दौरान डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। छठ पूजा खास तौर पर बिहार झारखंड पूर्वी उत्तर प्रदेश और देश के कई अन्य हिस्सों में बड़े स्तर पर मनाई जाती है।
इन व्रतों के बीच दशहरा धनतेरस दिवाली और भाई दूज जैसे प्रमुख त्योहार भी आएंगे। ऐसे में आने वाले सप्ताह धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बाजारों में भी त्योहारों की तैयारियां शुरू हो जाती हैं और घरों में पूजा पाठ के साथ खरीदारी का सिलसिला बढ़ जाता है।
करवा चौथ अहोई अष्टमी जितिया और छठ पूजा जैसे व्रत भारतीय परंपराओं में परिवार संतान और सुख समृद्धि से जुड़ी मान्यताओं को दर्शाते हैं। अलग अलग क्षेत्रों में इनके नियम और पूजा विधियां अलग हो सकती हैं इसलिए व्रत रखने से पहले स्थानीय पंचांग या परंपरा के अनुसार तिथि और पूजा समय की जानकारी देखना उचित रहता है।


