सोचिए… जिस नदी का पानी आपके देश में पहुंचने से पहले ही किसी दूसरे देश के हाथ में हो, तो क्या आप बिना उसकी जानकारी के रह सकते हैं?
यही वजह है कि भारत ने अब चीन से सीमा-पार नदियों का हाइड्रोलॉजिकल डेटा शेयर करने की मांग दोबारा उठाई है।

दरअसल, तिब्बत से निकलने वाली यारलुंग त्सांगपो, जिसे भारत में ब्रह्मपुत्र कहा जाता है, चीन से निकलकर भारत और फिर बांग्लादेश तक जाती है।
भारत और चीन के बीच पहले से नदी के पानी से जुड़ी जानकारी साझा करने की व्यवस्था रही है। इस डेटा में नदी का जलस्तर, बारिश और पानी के बहाव जैसी जानकारी शामिल होती है, जो बाढ़ की भविष्यवाणी और आपदा प्रबंधन के लिए बेहद अहम है।
लेकिन बड़ा सवाल ये है कि ये डेटा अभी क्यों चर्चा में आया?
भारत सरकार के मुताबिक, ब्रह्मपुत्र से जुड़ा डेटा-शेयरिंग MoU जून 2023 में खत्म हो गया था और तब से इसे दोबारा renew करने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं चीन की तरफ से ब्रह्मपुत्र पर बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को लेकर भी भारत अपनी चिंता जता रहा है।
और अब भारत चाहता है कि चीन नदी के बहाव और upstream projects से जुड़ी जरूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से साझा करे, ताकि नीचे की तरफ रहने वाले देशों पर संभावित बाढ़, पर्यावरण और जल-सुरक्षा के असर का आकलन किया जा सके।
यानी मामला सिर्फ पानी का नहीं है…
ब्रह्मपुत्र का डेटा अब भारत-चीन रिश्तों में कूटनीति, पर्यावरण और राष्ट्रीय सुरक्षा—तीनों से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।
अब देखना ये है कि चीन भारत की इस मांग पर क्या कदम उठाता है।

