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मुफ्त Wi-Fi यूज कर रहे हैं तो सावधान! ठगों ने ढूंढ़ा ठगी का नया तरीका, खाते से कट गए लाखों रुपये

डेस्क: मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस रेलवे स्टेशन पर एक शख्स को फ्री वाई-फाई का इस्तेमाल करना भारी पड़ गया। पुलिस को शक है कि सार्वजनिक Wi-Fi के जरिए पीड़ित के मोबाइल में मैलवेयर पहुंचा, जिसके बाद क्रेडिट कार्ड से बिना अनुमति के लाखों रुपये के ट्रांजैक्शन किए गए।
दरअसल, मुंबई के CSMT स्टेशन पर मुफ्त सार्वजनिक Wi-Fi से किया गया एक सामान्य कनेक्शन अब एक साइबर ठगी मामले की संभावित शुरुआत माना जा रहा है। इस मामले में एक बैंक के जनरल मैनेजर के क्रेडिट कार्ड से बिना अनुमति के 4.27 लाख रुपये के ट्रांजैक्शन किए गए।
पुलिस को संदेह है कि साइबर अपराधियों ने सबसे पहले बैंक अधिकारी के पर्सनल सेक्रेटरी का मोबाइल फोन उस समय हैक किया, जब उन्होंने स्टेशन के मुफ्त Wi-Fi नेटवर्क से अपना फोन कनेक्ट किया। इसके बाद हैक किए गए फोन से रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) के फर्जी चालान के रूप में एक दुर्भावनापूर्ण एंड्रॉयड एप्लिकेशन पैकेज (APK) फाइल उनके संपर्क सूची में मौजूद लोगों, जिनमें वरिष्ठ बैंक अधिकारी भी शामिल थे, को भेजनी शुरू कर दी।

इससे पहले अभी हाल में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफ़ाश किया था। यह गिरोह कथित तौर पर फ़र्ज़ी बैंक अकाउंट और सिम कार्ड के ज़रिए ऑनलाइन स्कैम और गैर-कानूनी गेमिंग ट्रांज़ैक्शन को अंजाम देता था। गोवा से बारह आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया है, जबकि जांचकर्ताओं का कहना है कि इस रैकेट को दुबई में बैठे हैंडलर चला रहे थे। यह कार्रवाई मुंबई के पायधुनी पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले की जांच के बाद की गई।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, यह कामयाबी क्राइम ब्रांच यूनिट 2 द्वारा की जा रही साइबर फ्रॉड मामले की जांच के दौरान मिली। टीम को जानकारी मिली थी कि मुंबई में फ़र्ज़ी बैंक अकाउंट खोले जा रहे थे और साइबर फ्रॉड व ऑनलाइन गेमिंग से मिले पैसे को गोवा भेजा जा रहा था। इस जानकारी के आधार पर, पुलिस ने कैंडोलिम में एक विला पर छापा मारा, जहाँ संदिग्ध कथित तौर पर यह नेटवर्क चला रहे थे। आरोपियों के पास से 15 लैपटॉप, 128 ATM कार्ड, 89 मोबाइल फ़ोन, 76 सिम कार्ड और 22 चेक बुक बरामद किए गए हैं। इससे पहले पिछले महीने जुलाई में मुंबई पुलिस ने किया 63 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया था। पुलिस ने APK फाइल बनाकर जालसाजों को बेचने वाले शख्स को गिरफ्तार किया था।

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