अंतरराष्ट्रीय

क्या पाकिस्तान में भी उठेगा ‘Gen Z’ आंदोलन? PoK हिंसा के बीच क्यों नहीं बन पा रही देशव्यापी युवा क्रांति

डेस्क: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में महंगाई, बुनियादी सुविधाओं की कमी और स्थानीय चुनावों में कथित धांधली को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, हालिया हिंसक झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है, जिसके बाद पाकिस्तान की नीतियों और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच यह बहस भी तेज हो गई है कि 60 प्रतिशत से अधिक युवा आबादी और करोड़ों Gen Z नागरिकों वाले पाकिस्तान में अब तक कोई व्यापक राष्ट्रीय युवा आंदोलन क्यों नहीं उभर पाया।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने PoK की स्थिति को लेकर पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि वहां के लोगों के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को घटनाक्रम पर ध्यान देना चाहिए।

सत्ता का ढांचा और ‘हाइब्रिड शासन’ की चर्चा
पाकिस्तान की  राजनीति को कई विश्लेषक “हाइब्रिड शासन” का मॉडल बताते हैं, जिसमें निर्वाचित सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक सत्ता में बदलाव के बावजूद सुरक्षा और रणनीतिक फैसलों पर सेना का प्रभाव बना रहता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जब किसी सरकार के खिलाफ जनाक्रोश बढ़ता है तो सत्ता परिवर्तन हो जाता है, लेकिन व्यवस्था के मूल ढांचे में बड़ा बदलाव नहीं आता। इससे जनता का गुस्सा अलग-अलग राजनीतिक दलों तक सीमित रह जाता है और किसी एक केंद्रीय लक्ष्य के खिलाफ व्यापक आंदोलन खड़ा नहीं हो पाता।
अलग-अलग मुद्दों में बंटा विरोध
पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शनों की कमी नहीं है, लेकिन वे अक्सर अलग-अलग क्षेत्रों और मुद्दों तक सीमित रहते हैं। कहीं महंगाई और बेरोजगारी प्रमुख मुद्दा है तो कहीं प्रांतीय अधिकार, संसाधनों का बंटवारा या सुरक्षा अभियान।
विश्लेषकों का मानना है कि बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, सिंध, पंजाब और PoK में उठने वाले आंदोलन अलग-अलग मांगों और नेतृत्व के कारण एक साझा राष्ट्रीय मंच पर नहीं आ पाते। यही वजह है कि विरोध की ऊर्जा देशव्यापी जनआंदोलन का रूप लेने से पहले ही बिखर जाती है।
इमरान खान प्रकरण के बाद बढ़ी राजनीतिक अनिश्चितता
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी और उनकी पार्टी के कई नेताओं व कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने कई बार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक गतिविधियों और नागरिक अधिकारों को लेकर चिंता जताई है।

इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध, मीडिया पर नियंत्रण के आरोप और विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती जैसे मुद्दों ने भी युवाओं के बीच असंतोष को बढ़ाया है। हालांकि यह असंतोष अभी तक किसी एक राष्ट्रीय युवा आंदोलन में तब्दील नहीं हो सका है।
क्या Gen Z भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकती है?
पाकिस्तान की आबादी का बड़ा हिस्सा युवा है और करोड़ों लोग Gen Z वर्ग में आते हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि यह वर्ग किसी साझा मुद्दे पर संगठित होता है तो देश की राजनीति पर उसका बड़ा असर पड़ सकता है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में राजनीतिक ध्रुवीकरण, क्षेत्रीय विभाजन और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां किसी व्यापक राष्ट्रव्यापी युवा आंदोलन के सामने बड़ी बाधा मानी जा रही हैं।
PoK में जारी विरोध प्रदर्शनों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पाकिस्तान का युवा वर्ग भविष्य में किसी बड़े लोकतांत्रिक या सामाजिक आंदोलन का नेतृत्व करेगा, या फिर मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे के कारण असंतोष अलग-अलग क्षेत्रों तक ही सीमित रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *