अंतरराष्ट्रीय

ब्लैक सी में भारतीय नाविकों पर हमलों का मुद्दा उठाया, जयशंकर ने यूक्रेनी विदेश मंत्री से कहा- ऐसे हमले अस्वीकार्य

डेस्क: ब्लैक सी (Black Sea) में वाणिज्यिक जहाजों और भारतीय नाविकों पर हुए हमलों को लेकर भारत ने अपना कड़ा रुख दोहराया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से टेलीफोन पर बातचीत की और स्पष्ट कहा कि किसी भी पक्ष द्वारा कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे सभी हमलों की स्पष्ट शब्दों में निंदा करता है।
दोनों नेताओं के बीच बातचीत के दौरान रूस-यूक्रेन संघर्ष, ब्लैक सी की सुरक्षा स्थिति और शांति प्रयासों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर जताई चिंता

हाल के दिनों में ब्लैक सी क्षेत्र में हुए हमलों में विदेशी झंडे वाले व्यापारिक जहाज भी प्रभावित हुए हैं। इन घटनाओं में पांच भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा यूक्रेन के चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर 13 भारतीय नाविकों के फंसे होने की भी जानकारी सामने आई है।
बातचीत के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने यूक्रेनी विदेश मंत्री के साथ भारतीय नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले किसी भी पक्ष की ओर से हों, वे पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और भारत उनकी निंदा करता है।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों का असर ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य आपूर्ति पर पड़ रहा है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ पर दिखाई दे रहा है।

यूक्रेन ने भारत से मांगा सहयोग
यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भी बातचीत की जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने भारत को यूक्रेन की मौजूदा स्थिति और शांति वार्ता से जुड़े ताजा घटनाक्रमों से अवगत कराया। उन्होंने भारत से शांति प्रयासों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

सिबिहा ने ब्लैक सी में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों को वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया। साथ ही उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की हालिया अमेरिकी यात्रा के प्रमुख परिणामों की भी जानकारी भारतीय विदेश मंत्री को दी।
बातचीत और कूटनीति पर भारत का जोर
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने का समर्थक है। नई दिल्ली लगातार दोनों पक्षों से तनाव कम करने और संवाद के रास्ते पर लौटने की अपील करती रही है।
गौरतलब है कि यूक्रेन लंबे समय से भारत से आग्रह करता रहा है कि वह रूस के साथ अपने संबंधों का उपयोग कर शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में रचनात्मक भूमिका निभाए। वहीं भारत का कहना है कि मौजूदा संकट का स्थायी समाधान केवल संवाद और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है।

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