डेस्क:प्रयागराज । गुरु पूर्णिमा के अवसर पर जहां लोग अपने गुरुओं के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त कर रहे हैं, वहीं प्रयागराज के समाजसेवी और यूपीएससी अभ्यर्थी अभिषेक शुक्ला शिक्षा से समाज में बदलाव की मिसाल पेश कर रहे हैं। उन्होंने पिछले कई वर्षों से झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले उन बच्चों के जीवन को बदलने का काम किया है, जो कभी शिक्षा से दूर, भिक्षावृत्ति और नशे जैसी समस्याओं से जूझ रहे थे। अभिषेक ने इन बच्चों को न केवल शिक्षा से जोड़ा, बल्कि उन्हें खेल, कला, आत्मरक्षा और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी दिया। अभिषेक शुक्ला ने आईएएनएस को बताया कि इस मुहिम की शुरुआत सितंबर 2016 में हुई थी। उस समय वह यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। एक दिन कोचिंग से लौटते समय उन्होंने चुंगी चौराहे पर एक छोटी बच्ची को भीख मांगते देखा। उस बच्ची के बारे में जानकारी जुटाने के लिए जब वह उसके पीछे-पीछे उसकी बस्ती तक पहुंचे, तो वहां उन्हें कई ऐसी बच्चियां और बच्चे मिले, जो भिक्षावृत्ति और नशे की समस्या में फंसे हुए थे। उन्होंने बताया कि बस्ती में रहने वाले कई बच्चे केवल तभी घर से बाहर निकलते थे, जब उन्हें किसी के घर में काम करने जाना होता था। इनमें से अधिकांश बच्चे शिक्षा से पूरी तरह वंचित थे। जब उन्होंने बच्चों के माता-पिता के सामने शिक्षा का प्रस्ताव रखा तो शुरुआत में उन्हें काफी विरोध का सामना करना पड़ा। अभिभावकों ने कहा कि पहले भी कई लोग मदद के नाम पर आते हैं और कुछ समय बाद चले जाते हैं। उन्हें डर था कि अगर बच्चे पढ़ाई के लिए जाएंगे तो घर के काम कौन करेगा और परिवार का खर्च कैसे चलेगा। हालांकि, अभिषेक ने लगातार बातचीत और प्रयासों के जरिए उन्हें समझाया। धीरे-धीरे कुछ बच्चों ने आना शुरू किया और पांच-छह बच्चों से शुरू हुआ यह सफर आज 250 से अधिक बच्चों तक पहुंच चुका है।
अभिषेक का कहना है कि शुरुआत से ही उनकी प्राथमिकता बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना रही है। उन्होंने महसूस किया कि कई बच्चे सरकारी स्कूलों में नामांकित तो हैं, लेकिन नियमित रूप से स्कूल नहीं जाते। इसका मुख्य कारण पढ़ाई में रुचि की कमी और उनके लिए अनुकूल माहौल का न होना था। इसलिए उन्होंने खेल-खेल में पढ़ाने और बच्चों की रुचि के अनुसार शिक्षा देने का प्रयास शुरू किया।
उन्होंने बताया कि आज कई बच्चे शिक्षा और विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल कर रहे हैं। दो बच्चे इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं और एक बच्चे को नौकरी भी मिल चुकी है। नंदिनी, भूमि और आंचल जैसी बच्चियां खेल क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए खेलो इंडिया तक पहुंच चुकी हैं। जिन बच्चों ने कभी हाथ में कलम तक नहीं पकड़ी थी, उनमें से कुछ अब दूसरों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं।
अभिषेक ने बताया कि उनके संस्थान से जुड़े बच्चे बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त कर रहे हैं और कई बच्चे इंजीनियरिंग, नर्सिंग, फाइन आर्ट्स सहित अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए नियमित रूप से पांच से छह घंटे की कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। इसके अलावा कूड़ा बीनने वाले और भीख मांगने वाले छोटे बच्चों के लिए एक रुपये में प्ले स्कूल भी संचालित किया जा रहा है, ताकि उन्हें शुरुआती स्तर से ही शिक्षा से जोड़ा जा सके।
अभिषेक ने बताया कि जब उन्होंने यह पहल शुरू की थी, तब उनका उद्देश्य अपनी यूपीएससी की तैयारी के साथ-साथ बच्चों को थोड़ा समय देना था। हालांकि धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि दोनों जिम्मेदारियां एक साथ निभाना आसान नहीं है। एक समय ऐसा आया जब उन्हें तय करना पड़ा कि वह अपनी यूपीएससी की तैयारी जारी रखें या इन बच्चों के भविष्य को संवारने में पूरी तरह जुट जाएं।
उन्होंने कहा कि उन्होंने दूसरा रास्ता चुना, क्योंकि उन्हें लगा कि भले ही एक अभिषेक आईएएस नहीं बन पाऐगा, लेकिन उसकी कोशिशों से सैकड़ों बच्चे अपने सपनों को पूरा कर पाए, तो यह बड़ी उपलब्धि होगी।
अभिषेक का कहना है कि एक गुरु के लिए सबसे खुशी का पल वही होता है, जब उसका शिष्य उससे आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि जब उनके बच्चे सफलता हासिल करते हैं, तो उन्हें ऐसा लगता है कि वह खुद सफल हो रहे हैं। खेलो इंडिया में बच्चियों को मेडल जीतते देखना, बच्चों को नौकरी और उच्च शिक्षा हासिल करते देखना उनके लिए सबसे भावुक और गर्व का क्षण होता है।

