डेस्क: पश्चिम बंगाल (West Bengal) विधानसभा में प्रस्तुत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट को लेकर राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवाओं, कोविड प्रबंधन, आपदा राहत, सरकारी योजनाओं, औद्योगिक भूमि आवंटन और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कई मामलों पर सवाल उठाए गए हैं। इन निष्कर्षों के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई (Action) की मांग की है।
रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 महामारी के दौरान राज्य को उपलब्ध कराए गए आवंटन में से मार्च 2022 तक 659.28 करोड़ रुपये खर्च नहीं किए गए। इसके अलावा पीएम केयर्स और कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत मिले 75 ऑक्सीजन संयंत्रों में से दिसंबर 2023 तक 43 संयंत्र चालू नहीं हो सके। कई सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराए गए वेंटिलेटर और ऑक्सीजन उपकरणों के उपयोग को लेकर भी रिपोर्ट में सवाल दर्ज किए गए हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े निष्कर्षों में रायगंज मेडिकल कॉलेज का भी उल्लेख किया गया है, जहां वर्ष 2020 से 2022 के बीच उपलब्ध कराए गए 17 आईसीयू वेंटिलेटर मार्च 2022 तक संचालित नहीं किए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के दौरान उपलब्ध संसाधनों के उपयोग में अपेक्षित दक्षता नहीं दिखाई गई।
सीएजी रिपोर्ट में चक्रवात अम्फान और यास के बाद वितरित राहत सहायता पर भी टिप्पणी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार अम्फान राहत योजना में हजारों लाभार्थियों को एक से अधिक बार मकान निर्माण सहायता दिए जाने का उल्लेख है, जिससे अतिरिक्त भुगतान हुआ। इसी प्रकार यास राहत योजना में भी कुछ लाभार्थियों को दोबारा सहायता मिलने का मामला दर्ज किया गया है, जिसके कारण अतिरिक्त व्यय की बात कही गई है।
युवाश्री योजना के क्रियान्वयन पर भी रिपोर्ट में प्रश्न उठाए गए हैं। लाभार्थियों के सत्यापन की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने के कारण अपात्र व्यक्तियों के सूची में बने रहने और एक ही व्यक्ति द्वारा लंबे समय तक लाभ लेने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा नदिया जिले के हरिणघाटा औद्योगिक पार्क में 99 वर्ष की लीज के दौरान जलाशय क्षेत्र शामिल होने से लगभग 13 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का उल्लेख भी रिपोर्ट में किया गया है।
वित्तीय प्रबंधन से जुड़े निष्कर्षों में कहा गया है कि वर्ष 2024-25 के दौरान बजट की 70,662.25 करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं हो सकी। साथ ही 13,486.92 करोड़ रुपये के अतिरिक्त व्यय को अब भी विधानसभा की मंजूरी मिलना बाकी है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य का राजस्व घाटा 39,727 करोड़ रुपये, राजकोषीय घाटा 61,924 करोड़ रुपये और कुल कर्ज लगभग 7.35 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद भाजपा ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्ष गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत करते हैं और पूरे मामले की जवाबदेही तय होनी चाहिए। भाजपा ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। दूसरी ओर, रिपोर्ट को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और बढ़ने की संभावना है।

