डेस्क: भारत-नेपाल सीमा (India-Nepal border) से संदिग्ध लोगों की आवाजाही कराने वाले एक संगठित नेटवर्क (Organized network) का बड़ा खुलासा हुआ है। पंजाब के अजनाला थाना हमला मामले के वांछित आरोपी विक्रमजीत सिंह की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों की जांच में ऐसे गिरोह का पता चला है, जो पैसे लेकर लोगों को नेपाल से भारत में अवैध रूप से प्रवेश दिलाता था। शुरुआती जांच के अनुसार, प्रति व्यक्ति 10 हजार रुपये लेकर सीमा पार कराई जाती थी, जबकि नेपाल से लखनऊ एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए अलग से वाहन की व्यवस्था की जाती थी।
अजनाला केस की जांच में सामने आया नेटवर्क
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, अजनाला थाना हमला कांड के वांछित विक्रमजीत सिंह और अमेरिका के कैलिफोर्निया निवासी मनवीर सिंह ढिल्लों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच में सामने आया कि स्थानीय नेटवर्क ने दोनों समेत अन्य लोगों को नेपाल से भारत लाने और आगे लखनऊ एयरपोर्ट तक पहुंचाने की पूरी योजना पहले से तैयार कर रखी थी।
बताया गया कि सीमा पार कराने के लिए प्रति व्यक्ति 10-10 हजार रुपये तय किए गए थे, जबकि नेपाल से लखनऊ तक इनोवा वाहन 15 हजार रुपये में बुक किया गया था। हालांकि, एसएसबी और रुपईडीहा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान सभी को गिरफ्तार कर लिया गया।
पांच वर्षों में 3800 से अधिक लोगों को कराया सीमा पार
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार स्थानीय आरोपी पिछले करीब पांच वर्षों से इस नेटवर्क का हिस्सा थे। प्रारंभिक पूछताछ में दावा किया गया है कि इस अवधि में 3,800 से अधिक लोगों को भारत-नेपाल सीमा पार कराई गई। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इनमें कितने लोग वैध दस्तावेजों के साथ आए थे और कितनों की एंट्री संदिग्ध परिस्थितियों में हुई।
यात्रियों से बातचीत कर तय होती थी रकम
पूछताछ में यह भी सामने आया कि नेटवर्क के सदस्य पहले यात्रियों से बातचीत कर उनकी पहचान, यात्रा का उद्देश्य और उपलब्ध दस्तावेजों की जानकारी लेते थे। इसके बाद जोखिम और परिस्थितियों के आधार पर सीमा पार कराने की रकम तय की जाती थी। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मॉड्यूल और इसके संचालन के तरीके की विस्तृत जांच कर रही हैं।
तीन स्थानीय आरोपी जांच के दायरे में
इस मामले में गिरफ्तार इनोवा चालक राहुल कुमार रुपईडीहा क्षेत्र के केवलपुर गांव का निवासी है। उसके दो सहयोगी सुरेश कुमार पाठक और दिलीप महानंद पुरवा के रहने वाले बताए गए हैं। तीनों से लगातार पूछताछ की जा रही है और उनके पुराने संपर्कों तथा गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
संपत्तियों और लेन-देन की होगी पड़ताल
बहराइच के पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि स्थानीय आरोपियों की भूमिका की गहन जांच जारी है। उनके वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, संपत्तियों और आय के स्रोतों की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में आरोपियों ने जमीन, मकान और अन्य निवेश के जरिए उल्लेखनीय संपत्ति अर्जित की है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

