डेस्क: भारत-बांग्लादेश सीमा (Border) की सुरक्षा को नई मजबूती देने की दिशा में सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force) (BSF) ने पश्चिम बंगाल के सुंदरबन (Sundarbans) क्षेत्र में पहली बार लगभग 90 किलोमीटर लंबी फेंसिंग (Fencing) करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य सीमा पार घुसपैठ (Infiltration), तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद परियोजना के लिए व्यवहार्यता और तकनीकी अध्ययन का काम शुरू कर दिया गया है, जिससे इस चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा ढांचा विकसित किया जा सके।
सुंदरबन भारत-बांग्लादेश सीमा का सबसे जटिल इलाका माना जाता है। यहां घने जंगल, ज्वारीय दलदल, नदी-नाले और तटीय तटबंध बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जिसके कारण पारंपरिक सीमा बाड़बंदी अब तक संभव नहीं हो सकी थी। वर्तमान में इस क्षेत्र के नदी मार्गों पर किसी प्रकार की स्थायी फेंसिंग नहीं है और सीमा की निगरानी मुख्य रूप से फ्लोटिंग बॉर्डर आउटपोस्ट तथा जल गश्ती के माध्यम से की जाती है।
नई योजना के तहत केवल फेंसिंग ही नहीं बल्कि आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। सीमा क्षेत्र में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, अतिरिक्त सर्चलाइट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक निगरानी उपकरण लगाए जाने की योजना है ताकि दिन और रात दोनों समय सीमा पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके। समुद्री गश्त को भी पहले की तुलना में अधिक सशक्त बनाने की तैयारी की जा रही है।
हाल ही में बीएसएफ के महानिदेशक ने सुंदरबन क्षेत्र का दौरा कर प्रस्तावित परियोजना और मौजूदा सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों के साथ बैठक में फेंसिंग कार्य को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने, नदी क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक सुरक्षा प्रणाली इस संवेदनशील क्षेत्र में सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाएगी।
सुंदरबन का एक बड़ा हिस्सा संरक्षित वन क्षेत्र और वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत आता है। भारत-बांग्लादेश सीमा का लगभग 71 किलोमीटर हिस्सा इसी संरक्षित क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में किसी भी निर्माण कार्य को पर्यावरणीय नियमों और आवश्यक अनुमतियों के अनुरूप ही आगे बढ़ाया जाएगा। परियोजना के दौरान पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि सुंदरबन घुसपैठ का सबसे बड़ा मार्ग नहीं माना जाता, लेकिन तस्करी और अन्य सीमा पार अपराधों के लिए इसका उपयोग समय-समय पर होता रहा है। इसी कारण इस क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना आवश्यक माना गया है। प्रस्तावित फेंसिंग और आधुनिक निगरानी प्रणाली के लागू होने से सीमा पर अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर भूमि अधिग्रहण और संभावित विस्थापन को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। क्षेत्र के कुछ परिवारों और होटल-लॉज संचालकों ने अपनी आशंकाएं प्रशासन के सामने रखी हैं। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि प्रभावित लोगों को नियमानुसार मुआवजा और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जल्द ही बीएसएफ और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम विस्तृत भूमि सर्वेक्षण शुरू करेगी, जिसके आधार पर परियोजना के अगले चरण का कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में यह परियोजना भारत-बांग्लादेश सीमा प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

