डेस्क:अयोध्या,। अयोध्या में विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर संतों, महंतों और धार्मिक ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने राम मंदिर ट्रस्ट की आगामी बैठक, कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद और मथुरा में प्रस्तावित कार सेवा पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी कमल नयन दास ने मथुरा और काशी से जुड़े सवाल पर कहा कि “मथुरा-काशी सब कुछ हमारा है और सब हमारा ही होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जो उनकी दृष्टि में देश और सनातन धर्म के हित में नहीं हैं। यदि पिछले चुनाव के दौरान भ्रामक प्रचार नहीं हुआ होता तो प्रधानमंत्री अब तक उन प्रावधानों को समाप्त कर चुके होते।
इसी क्रम में कमल नयन दास ने 22 जुलाई को प्रस्तावित राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक पर भी प्रतिक्रिया दी। बैठक में ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति और महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी से जुड़े विषयों पर चर्चा होनी है। इस संबंध में उन्होंने कहा कि ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है, कोई सरकारी संस्थान नहीं, इसलिए इसके मामलों में उसी भावना के अनुरूप निर्णय होने चाहिए।
कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई को लेकर साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास ने न्यायपालिका पर भरोसा जताया।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या सनातन धर्मावलंबियों के लिए भगवान राम की जन्मभूमि होने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है, उसी प्रकार मथुरा भगवान कृष्ण की जन्मभूमि होने के कारण समान रूप से आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्षता पर पूरा विश्वास है और न्यायालय से न्यायपूर्ण निर्णय की अपेक्षा है।
राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े विवाद और उसकी जांच पर भी सीताराम दास ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संत समाज और हिंदू समाज को विशेष जांच दल तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाले प्रशासन पर पूरा भरोसा है। अंतरिम रिपोर्ट के बाद एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट भी शीघ्र प्रस्तुत करेगी और पूरे मामले के तथ्य स्पष्ट होंगे।
मथुरा में अगस्त माह के दौरान कार सेवा शुरू होने की खबरों पर सीताराम दास ने कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के आंदोलन में कार सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उनका कहना था कि अब संत समाज ने कृष्ण जन्मभूमि के लिए भी कार सेवा का आह्वान किया है और उनका विश्वास है कि इसी माध्यम से वहां भी भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि संत समाज इसके लिए पूरी तरह तैयार है।
महामंडलेश्वर विष्णु दास ने ज्ञानवापी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “ज्ञानवापी” नाम किसी मंदिर का हो सकता है, किसी मस्जिद का नहीं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे संविधान, कानून और सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं तथा सर्वोच्च न्यायालय जो भी निर्णय देगा, उसे स्वीकार किया जाएगा।
राम मंदिर चढ़ावा के मामले में एसआईटी की जांच को लेकर विष्णु दास ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि जांच एजेंसी को महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त होंगे। राम मंदिर भगवान राम के भक्तों की आस्था का केंद्र है और उन्हें उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होगी।
कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर भी विष्णु दास ने कहा कि भगवान कृष्ण के संतों और भक्तों को आशा है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की भी उसी तरह निष्पक्ष सुनवाई करेगा, जैसी अयोध्या विवाद में हुई थी। उन्होंने विश्वास जताया कि न्यायालय का फैसला हिंदू पक्ष के पक्ष में आएगा।
संत सत्येंद्र दास वेदांत जी महाराज ने भी मथुरा मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को लेकर कहा कि देशभर के संत और श्रद्धालु बड़ी उम्मीद के साथ सर्वोच्च न्यायालय की ओर देख रहे हैं। जैसे राम जन्मभूमि मामले में फैसला आया था, वैसे ही मथुरा विवाद में भी सनातन धर्म को मानने वालों के पक्ष में निर्णय आने की उन्हें उम्मीद है।
वहीं, बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने अयोध्या की वर्तमान स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अयोध्या भगवान राम की नगरी है और लोगों को यहां आकर पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अयोध्या को स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित बनाए रखने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि अतीत में जो दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुईं, उनसे आगे बढ़ते हुए शहर के विकास और सकारात्मक वातावरण पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि जिन्होंने कानून का उल्लंघन किया, वे न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं और लोगों को अयोध्या के बारे में अनावश्यक नकारात्मक बातें फैलाने से बचना चाहिए।

