स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. के अध्यादेश एवं विनियमावली विद्वत्परिषद् की हरी झंडी
ललित कला एवं संगीत विभाग को जागृत करने पर विचार
2026 से प्रवृत्त होगा आचार्य अध्यादेश एवं विनियमावली
दरभंगा।
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक दरबार हॉल में मंगलवार को कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पाण्डेय की अध्यक्षता में
आयोजित विद्वत्परिषद की बैठक में लिए गए निर्णयों के बाद कई पाठ्यक्रमों के अध्यादेश व विनिमावली में साफ बदलाव दिखेंगे। लोकभवन, पटना से समय समय पर जारी आदेशों- निर्देशों के आलोक में शास्त्री व आचार्य पाठ्यक्रमों में लाये जाने वाले संशोधनों पर बैठक में परिषद की मुहर लग गई। इस तरह अब नए स्वरूप में कार्यों का निपटारा होगा।
उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ डॉ निशिकांत ने बताया कि मूलरूप से करीब 20 एजेंडों को परिषद के पटल पर रखा गया था जिसमें अधिकांश प्रस्ताव लोकभवन के आदेश निर्देश से ही सम्बन्धित थे।
कुलसचिव सह सचिव डॉ. दिनेश झा द्वारा गणपूर्ति की सूचना देने के बाद वैदिक मंगलाचरण एवं सरस्वती पूजन से कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
बैठक में सर्वप्रथम विद्वत्परिषद् की 03 अगस्त 2024 दिवसीय कार्यवाही एवं कार्यान्वयन प्रतिवेदन की सम्पुष्ट किया गया। इसी तरह लोकभवन पटना द्वारा स्नातक पाठ्यक्रम सम्बन्धी आवश्यक दिशानिर्देश तथा प्रवेश अध्यादेश आदि अधिसूचना को सदस्यों द्वारा पारित कर दिया गया।
वहीं, दो वर्षीय (4-सेमेस्टर) तथा एक वर्षीय (2-सेमेस्टर) स्नातकोत्तर (पी.जी.) पाठ्यक्रमों के प्रारूप अध्यादेश एवं विनियमों पर भी सदस्यों की स्वीकृति मिल गई। इसी तरह एकीकृत अध्यादेश एवं विनियम (पीएच.डी. उपाधि प्रदान करने हेतु न्यूनतम मानक एवं प्रक्रिया), 2026 को भी अनुमोदित कर दिया गया। 2026-27 से समर्थ पोर्टल के माध्यम से संस्कृत विश्वविद्यालय में सभी शैक्षणिक कार्यों के संपादन पर आम सहमति रही। महत्वपूर्ण कदम यह रहा कि समर्थ पोर्टल हेतु विभाग/महाविद्यालय-वार (विषयवार स्थान/सीट) छात्रों के सीटों को निर्धारित किया गया। साथ ही
दो वर्षीय उपशास्त्री के संशोधित पाठ्यक्रम को अनुमोदित करते हुए क्रियान्वयन पर भी स्वीकृति प्रदान की गई। शिक्षाशास्त्र विभाग में आईटीईपी (ITEP) पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने पर भी आमसहमति रही। पदोन्नति हेतु संकायाध्यक्षों द्वारा निर्मित विषय विशेषज्ञों की सूची को अनुमोदित करते हुए अग्रिम कार्यवाही के लिये सदस्यों द्वारा कुलपति को ही अधिकृत कर दिया गया। द्विवर्षीय संशोधित शिक्षाशास्त्री पाठ्यक्रम को भी परिषद की हरी झंडी मिल गयी। 26 नवंबर 2024 एवं 15 अप्रैल 2026 दिवसीय परीक्षापरिषद् की कार्यवाही को भी अनुमोदित कर दिया गया। बैठक में धर्मशास्त्र विभागाध्यक्ष सह शोध प्रभारी प्रो. दिलीप कुमार झा ने अध्यक्षानुमत्या विश्वविद्यालय में ललित कला एवं संगीत विभाग को जागृत करने का मुद्दा उठाया। इस पर कुलपति प्रो पांडेय ने सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। वहीं, सिवान के प्रधानाचार्य ने व्यावसायिक शिक्षा को बढावा देने की बात कही।
बैठक में संकायाध्यक्षों में प्रो. दिलीप कुमार झा, प्रो. दयानाथ झा, प्रो. शिवलोचन झा, डॉ. शम्भुशरण तिवारी तथा विभागाध्यक्षों में डॉ. सीताचरण झा, डॉ. रामनिहोरा राय, डॉ. संतोष पासवान, डॉ. धीरज कुमार पाण्डेय, डॉ. ध्रुव मिश्र उपस्थित थे। वहीं विभिन्न अंगीभूत एवं सम्बद्ध महाविद्यालय के प्रधानाचार्य गण सदस्य के रूप में उपस्थित थे। सभी सदस्यों का स्वागत डीएसडब्लू प्रो. पुरेन्द्र वारिक ने किया। शैक्षणिक एवं तकनीकी सहयोग के रूप में ओएसडी शैक्षणिक डॉ. रामसेवक झा, डॉ. छविलाल न्यौपाने, डॉ. गोपाल कुमार झा, गोपाल उपाध्याय, आकाश कुमार, सतीश शर्मा आदि उपस्थित थे।

