राजस्थान: अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी के खुलासे के बाद अब राजस्थान के नागौर जिले में स्थित आस्था के बड़े केंद्र बूटाटी धाम में करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है. देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और लकवा रोगियों की आस्था से जुड़े इस मंदिर में चढ़ावे और मंदिर निधि में 22 करोड़ 74 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है.
जिला कलेक्टर के आदेश पर गठित 13 सदस्यीय जांच समिति ने 146 दिनों तक रिकॉर्ड, ऑडिट दस्तावेजों और वास्तविक अभिलेखों की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कई गंभीर गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है. जांच रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों का पूरा रिकॉर्ड नहीं मिला. करीब 2.60 करोड़ रुपये मूल्य की कीमती धातुओं का लेखा-जोखा स्टॉक रजिस्टर और वित्तीय रिकॉर्ड में दर्ज नहीं पाया गया.
भोजनशाला निर्माण के लगाए फर्जी बिल
भोजनशाला निर्माण के नाम पर 49.49 लाख रुपये के कथित फर्जी बिल लगाए गए, जबकि जांच में सामने आया कि निर्माण का बड़ा हिस्सा एक भामाशाह ने अपने खर्च पर कराया था. इसके अलावा रसोई खर्च एक साल में 335 से 350 प्रतिशत तक बढ़ाकर दिखाया गया. दो वर्षों में सीसीटीवी पर 82.41 लाख रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन न टेंडर मिला और न ही कोटेशन मिला.
भोजनशाला निर्माण के लगाए फर्जी बिल
भोजनशाला निर्माण के नाम पर 49.49 लाख रुपये के कथित फर्जी बिल लगाए गए, जबकि जांच में सामने आया कि निर्माण का बड़ा हिस्सा एक भामाशाह ने अपने खर्च पर कराया था. इसके अलावा रसोई खर्च एक साल में 335 से 350 प्रतिशत तक बढ़ाकर दिखाया गया. दो वर्षों में सीसीटीवी पर 82.41 लाख रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन न टेंडर मिला और न ही कोटेशन मिला.
इसी तरह गौशाला रख-रखाव और सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर 49 लाख रुपये से अधिक के संदिग्ध भुगतान, ग्राम विकास, मरम्मत, फर्नीचर और कंप्यूटर मद में लाखों रुपये बिना पर्याप्त दस्तावेजों के खर्च दिखाए गए. दान पेटी की राशि और बैंक खातों में भी लाखों रुपये का अंतर मिला. जांच समिति ने संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर, फॉरेंसिक ऑडिट और सख्त कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है.

मंदिर से ठीक होकर जाते हैं लकवा मरीज
राजस्थान के इस मंदिर में देश के कोने-कोने के साथ ही विदेशों से भी लकवा रोगी इलाज के लिए आते हैं. मान्यता है कि यहां आने से लकवा रोगी ठीक हो जाते हैं. इस मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि इतने बड़े आस्था केंद्र में करोड़ों रुपये के गबन की रिपोर्ट बेहद गंभीर है.
उन्होंने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि यदि लंबे समय से दान-पेटी, सोने-चांदी के चढ़ावे और फर्जी बिलों का खेल चल रहा था तो देवस्थान विभाग और प्रशासन क्या कर रहा था. जूली ने कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों पर बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई होनी चाहिए.
देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत का बयान
वहीं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था के पैसे में भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने बताया कि जांच समिति की सिफारिशों का अध्ययन किया जा रहा है और उसी के आधार पर मंदिर विकास समिति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी. साथ ही मंदिर प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की बात भी कही.
हालांकि, मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राठी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि उनके पास हर खर्च का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है और वे अदालत में दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखेंगे. फिलहाल अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर, कानूनी कार्रवाई और आरोप तय करने की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है.

