डेस्क: पेट्रोल (Petrol) में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20 Ethanol) यानी E20 ईंधन को लेकर देशभर में उठ रहे सवालों पर केंद्र सरकार (Central Government) ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार का कहना है कि E20 को अपनाने का निर्णय किसी जल्दबाजी में नहीं लिया गया, बल्कि यह वर्षों की तैयारी, वैज्ञानिक परीक्षण और वाहन उद्योग सहित विभिन्न संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू की गई राष्ट्रीय रणनीति (National Strategy) का हिस्सा है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य केवल ईंधन की कीमत कम करना नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को मजबूत करना और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, देशभर के पेट्रोल पंपों पर एक साथ शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 जैसे कई प्रकार के ईंधन उपलब्ध कराना परिचालन और लॉजिस्टिक दृष्टि से अत्यंत जटिल होगा। अलग-अलग ग्रेड के ईंधन के लिए भंडारण, परिवहन और वितरण की अलग व्यवस्था करनी पड़ेगी, जिससे पूरी आपूर्ति प्रणाली प्रभावित हो सकती है। इसी कारण देश में चरणबद्ध तरीके से E20 को प्राथमिक ईंधन के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार ने यह भी कहा कि इथेनॉल मिश्रण कोई नई अवधारणा नहीं है। ब्राजील और अमेरिका जैसे कई देश वर्षों से इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं। भारत में भी इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम वर्ष 2001 से लागू है और पिछले दो दशकों में इसे लगातार विकसित किया गया है। इस दौरान ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों, परीक्षण एजेंसियों और तकनीकी विशेषज्ञों से नियमित परामर्श किया गया। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि E20 को बिना तैयारी के लागू किया गया है।
E20 पेट्रोल की कीमत को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय के अनुसार, इथेनॉल किसानों से लाभकारी मूल्य पर खरीदा जाता है ताकि उन्हें उनकी उपज का उचित भुगतान मिल सके। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों को देखते हुए E20 का उत्पादन हमेशा शुद्ध पेट्रोल से सस्ता नहीं पड़ता। हालांकि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि होती है तो इथेनॉल आधारित ईंधन अपेक्षाकृत अधिक किफायती साबित हो सकता है। इसलिए इसकी नीति का उद्देश्य केवल उपभोक्ताओं को सस्ता पेट्रोल उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करना है।
सरकार ने पुराने वाहनों को लेकर फैल रही आशंकाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय का कहना है कि सोशल मीडिया पर E20 को लेकर कई भ्रामक दावे प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनका वैज्ञानिक आधार नहीं है। देश की इथेनॉल आपूर्ति प्रणाली कड़े गुणवत्ता मानकों और नियामकीय व्यवस्था के तहत संचालित होती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को अपुष्ट सूचनाओं के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की सलाह दी गई है।
सरकार के अनुसार, इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से देश को कई स्तरों पर लाभ मिला है। इससे विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत हुई है, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है और किसानों को इथेनॉल उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय का अवसर मिला है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में E20 कार्यक्रम भारत की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जबकि इसके प्रभावों की लगातार समीक्षा और निगरानी भी जारी रहेगी।

